अमेरिका भी चाहता तेजस खरीदना

एक वक्त था जब भारत दूसरे देशों से फाइटर जेट खरीद रहा था। पर अब भारत में निर्मित फाइटर जेट ‘तेजस’ को अमेरिका जैसा ताकतवर देश खरीदना चाह रहा है।

भारत अब दुनिया के दूसरे देशों से सिर्फ फाइटर जेट खरीदेगा नहीं, बल्कि बेचेगा भी। यह जानकारी गत 5 अगस्त को संसद में रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने दी है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (हॉल) एक इंजन वाले तेजस फाइटर जेट का निर्माण करती है। इसके लिए पिछले साल अक्टूबर में रॉयल मलेशियाई वायु सेना ने 18 जेट विमानों के प्रस्ताव के अनुरोध का जवाब दिया था, जिसमें तेजस के 2 सीटों वाले संस्करण को बेचने की पेशकश की गई थी। इस विमान को खरीदने में 6 अन्य देश-अमेरिका, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, मिस्र, इंडोनेशिया और फिलिपींस ने भी दिलचस्पी दिखाई है।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक आर माधवन ने कहा कि मलेशिया के सामने तेजस फाइटर जेट के साथ ही और भी विकल्प थे। इनमें चीन के जेएफ-17 जेट, दक्षिण कोरिया के एफए-50 और रूस के मिग-35 के साथ-साथ याक-130 शामिल थे। इसके बावजूद मलेशिया ने तेजस खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। उन्होंने कहा कि देखरेख एवं मरम्मत, भार, कीमत और मारक क्षमता के लिहाज से तेजस ने दुनिया के 4 ताकतवर विमानों को पीछे छोड़ दिया है।

पिछले पांच दशकों में 400 से ज्यादा मिग-21 विमानों के क्रैश होने की वजह से भारत सरकार इसे बदलना करना चाह रही थी। मिग-21 की जगह लेने में कामयाब हुआ तेजस। इस विमान का वजन कम होने की वजह से यह समुद्री पोतों पर भी आसानी से लैंड और टेक ऑफ कर सकता है। यही नहीं इसकी हथियार ले जाने की क्षमता मिग-21 से दोगुना है। राफेल से 300 किलोमीटर प्रति घंटा ज्यादा रफ्तार तेजस की है।

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