साइबर ठगों के निशाने पर अब मंत्री, अधिकारी

राजस्थान के मंत्रियों तथा आईएए व आईपीएस अधिकारियों को साइबर अपराधी खुली चुनौती दे रहे हैं। असम, बंगाल, झारखंड और मध्यप्रदेश की आईडी से फर्जी मोबाइल नंबर के जरिए राज्य के हाई प्रोफाइल लोगों तक से ठगी की जा रही है। किसी अनजान व्यक्ति से ओटीपी लेकर वॉट्सऐप अकाउंट चलाया जा रहा है। उस व्यक्ति को पता ही नहीं होता कि उसका वॉट्सऐप कोई और यूज कर रहा है।

वॉट्सऐप अकाउंट पर आईएएस-आईपीएस और मंत्रियों की डीपी लगाकर ठगी का नया फंडा अपनाया जा रहा है। साइबर ठग वॉट्सऐप डीपी लगे नंबरों से परिचितों-रिश्तेदारों को संदेश भेजकर रुपए और गिफ्ट वाउचर की मांग करते हैं। कई लोग इनके झांसे में आकर पैसे भेज देते हैं। यहां तक कि साइबर ठगों ने प्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी एमएल लाठर, मुख्य सचिव ऊषा शर्मा सहित राजस्थान सीएम अशोक गहलोत की फेक डीपी लगाकर ठगी की कोशिश की। साइबर अपराधियों को पकड़ना तो दूर अभी तक पुलिस उनकी पहचान भी नहीं कर सकी है।

साइबर थाना एसएचओ सतीश चौधरी ने बताया कि 27 जुलाई की सुबह एक साइबर अपराधी ने एसीबी के एडीजी दिनेश एमएन की फोटो लगाकर उनके परिचितों को वॉट्सऐप मैसेज भेजे थे। संदेश में खुद को एक मीटिंग में व्यस्त होना बताकर रुपयों और गिफ्ट वाउचर के जरिए ठगी की कोशिश की।

ये शातिर ठग कामयाब नहीं हुए तो इसी वॉट्सऐप नंबर पर एसीबी के डीजे बीएल सोनी और फिर कैबिनेट मंत्री शांति धारीवाल की फोटो लगाकर ठगी की कोशिश की। यहां तक की सीएम अशोक की वॉट्सऐप डीपी लगाकर 3 लाख रुपए मांगे गए। सचिवालय के डीएस प्रोटोकॉल नरेश विजय से दो लाख रुपए की मांग की गई है, जहां अमेजन गिफ्ट कार्ड मांगा गया है। मामला सामने आने के बाद इस संबंध में जानकारी मुख्यमंत्री ऑफिस को दी गई।

महज 30-40 हजार रुपए मांगने की बात परिचितों को समझ नहीं पाई। उन्होंने इन अधिकारियों और मंत्री को खबर कर दी। ठगों ने देर शाम तक एक और कैबिनेट मंत्री शकुंतला रावत की वॉट्सऐप डीपी लगाकर परिचितों को मैसेज भेजे। खुद को मीटिंग में व्यस्त होना बताकर रुपयों व गिफ्ट वाउचर की डिमांड की। साइबर ठगों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों पर कैबिनेट मंत्री शाले मोहम्मद और सीएम गहलोत के सलाहकार विधायक राजकुमार शर्मा के नाम से भी इसी तरह ठगी करने का प्रयास किया।

परिचितों से साइबर ठगी की कोशिश होने की जानकारी मिलने पर सभी अफसरों व मंत्रियों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट और मैसेजों के जरिए सावधान रहने की अपील की है। पुलिस ने भी अपील की है कि यदि ऐसे संदेश आते है तो संबंधित व्यक्ति से बात जरूर करें। ताकि कोई साइबर ठगी का शिकार न हो जाए। हालांकि, ज्यादातर मामलों में पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन किसी भी तरह का मुकदमा इन अफसरों व मंत्रियों की तरफ से दर्ज नहीं करवाया गया।

वॉट्सऐप नंबर पर फेक डीपी लगाकर ठगी का प्रयास करने वाले ठगों के मोबाइल नंबर की वॉट्सऐप प्रोफाइल को ब्लॉक करवाना आसान नहीं है। क्योंकि भारत में वॉट्सऐप का सर्वर मौजूद नहीं है। ऐसे में इन फेक प्रोफाइल का एक डेटाबेस तैयार कर उन प्रोफाइल को ब्लॉक करवाने के लिए वॉट्सऐप के मुख्यालय में मेल के जरिए संपर्क किया जाता है। इस प्रकिया में काफी वक्त लगता है। इसका फायदा साइबर ठगों को होता है।

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