मंत्री को बाधक कानून तोड़ने का अधिकार

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को नागपुर में अफसरों की जमकर करते खिंचाई करते हुए जो कहा, वो तुरंत सुर्खियों में गया। गडकरी ने कहा– चूंकि हम मंत्री हैं, इसलिए हमें उस कानून को तोड़ने का अधिकार है जो गरीबों के कल्याण में बाधा डालता है।

महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंस की नागपुर शाखा द्वारा शुरू किए गए आदिवासी ब्लॉसम प्रोजेक्ट के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने बताया कि गढ़चिरौली और मेलघाट में सड़कों के निर्माण में काफी परेशानी हुई। वन विभाग के अधिकारी वहां सड़कों के निर्माण की अनुमति नहीं दे रहे थे, जिसकी वजह से इन क्षेत्रों के दूरदराज के गांवों का विकास रुका था। मैं 1995 में महाराष्ट्र में मंत्री था।वउस समय मैंने मुंबई में कई सड़कें और पुल बनावाए थे, लेकिन गढ़चिरौली मेलघाट में सड़क निर्माण में काफी दिक्कतें आईं। यहां 2000 बच्चों की मौत कुपोषण से हो गयी थी, 450 गांवों में सड़क नहीं थी। उस समय मनोहर जोशी राज्य के मुख्यमंत्री थे। बहुत कोशिश की आयुक्त को बताया, लेकिन वन विभाग के अधिकारी सड़कों का निर्माण नहीं होने दे रहे थे, इसलिए बहुत परेशानी हुई।

गडकरी ने कहा, वन विभाग द्वारा परेशान किए जाने के बावजूद मैंने अपने तरीके से मामले को सुलझाया। कोई भी कानून गरीबों के कल्याण में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। महात्मा गांधी ने कहा है कि गरीबों के कल्याण के लिए आड़े आने वाले कानून को अगर तोड़ना पड़े तो एक बार नहीं दस बार तोड़ा जाना चाहिए। हमें उस कानून को तोड़ने का अधिकार है, क्योंकि हम मंत्री हैं। गडकरी ने नौकरशाहों पर बरसते हुए कहा, मैं हमेशा अधिकारियों से कहता हूं कि आप बस हां सर कहिए, हम जो कहते हैं उस पर अमल करिए। हम जैसा कहेंगे सरकार काम करेगी। इसलिए मैंने कानून तोड़ा और मेलघाट में 450 गांवों को जोड़ा।

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