बेटा शहीद, गर्भवती पत्नी व घरवालों को कौन बताए

कश्मीर में बेटे को शहीद हुए 24 घंटे से ज्यादा होने के बाद भी राजस्थान के सीकर जिले में  मां-बाप और भाई को कोई जानकारी नहीं है। वे रोज की तरह आज भी खेती-बाड़ी के अपने काम पर निकल गए। घर के सामने वाली दुकान से पड़ोसी उन्हें जाते हुए देखते रहे, लेकिन कोई भी बेटे सुभाष चंद्र बैरवाल के शहीद होने की खबर सुनाने की हिम्मत नहीं कर पाया।

ससुराल से करीब 50 किमी दूर सुभाष की 8 महीने की गर्भवती पत्नी सरला अपने मायके में पति के फोन का इंतजार कर रही है। रोज बात होती थी, लेकिन मंगलवार से कोई फोन ही नहीं आया। सरला के भाई को जीजा के शहीद होने की खबर मिल चुकी है, लेकिन वह भी अपनी बहन को यह खबर सुनाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

सबको डर है कि यह मनहूस खबर परिवार सहन नहीं कर पाएगा। मां-बाप का कलेजा फट जाएगा। उधर, मायके में अपने आने वाले बच्चे के लिए तैयारी कर रही सरला की दुनिया उजड़ जाएगी। 29 साल के सुभाष की मां-बाप, भाई-बहन सहित घर के सभी सदस्यों से तकरीबन रोज बात होती थी। मां-बाप हैं, इसलिए मंगलवार को दिनभर बेटे से बात नहीं हुई तो अनजाने डर और अनहोनी की आशंका ने उन्हें घेर लिया और बेचैन बुजुर्ग माता-पिता रोने भी लगे थे।

शहीद सुभाष के गांव धोद इलाके के शाहपुरा में हर तरफ एक अजीब सी खामोशी छाई हुई है। सुबाष के घर के सामने मिठाई की एक दुकान पर खड़े  5-7 लोग इस असमंजस में दिखे कि उसके परिवार को खबर करने की हिम्मत कैसे जुटाएं? ये दुकान सुभाष के पड़ोसी राकेश सैनी की है। वह उसे अपने छोटे भाई की तरह मानते थे। इन्हीं की दुकान पर आईटीबीपी के अधिकारियों का फोन आया और सुभाष की शहादत के बारे में पता चला। राकेश ने बताया, घर में सुभाष के पिता कालू राम और माता शांति देवी हैं। दोनों खेती-बाड़ी का काम करते हैं। शाम को घर आने के बाद कम ही बाहर निकलते हैं। छोटा भाई मुकेश मजदूरी का काम करता है। वह भी रात को ही काम से लौटता है। एक छोटी बहन सरोज है। वह 10वीं पास है। कल रात माता-पिता और भाई-बहन घर में ही थे, लेकिन किसी को खबर नहीं थी। हमारी भी हिम्मत नहीं हुई कि उनके पास जाकर बात कर सकें। शहीद की पत्नी अपने मायके फतेहपुर में है।

राकेश ने बताया, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात सुभाष अपने माता-पिता के लिए उनके नंबर पर ही रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करता था। वह आगे उनके परिवार को देते थे। मंगलवार शाम को आईटीबीपी का फोन आने पर उसकी शहादत का पता चला। राकेश ने कहा, अधिकारी सुभाष के घर में से किसी का नंबर मांग रहे थे, लेकिन मैंने गलत नंबर दे दिया। ताकि मां-बाप को एकदम से झटका न लगे। इसके बाद आईटीबीपी के अधिकारियों ने उसकी पत्नी सरला के नंबर पर फोन किया। वहां फोन पर उसके भाई ने बात की तो उसे भी जानकारी मिली। फिर मैंने भी सुभाष के ससुरालवालों से भी संपर्क किया है। वहां भी उसकी पत्नी को फिलहाल कुछ नहीं बताया गया है।

सुभाष की 2018 में शादी हुई थी। वह जल्द ही पिता बनने वाले थे। पति-पत्नी को अपने आने वाले बच्चे का बेसब्री से इंतजार था। सुभाष के साले मामराज चिराणिया ने बताया कि राखी पर बहन पीहर फतेहपुर आई थी। बहन की हालत को देखते हुए उसे कुछ बताया नहीं है। परिवार के लोगों ने फोन भी उससे दूर रखा है। 

मिली जानकारी के अनुसार शहीद सुभाष का शव आज शाम दिल्ली आने की संभावना है। वहां से उसके गांव के लिए शव को रवाना किया जाएगा। शहीद के पड़ोसियों ने बताया कि सुभाष का सेना में जाने का सपना शुरू से था। गांव के कई लोग पुलिस और सेना में भर्ती हुए हैं। उन्हें देखकर उसके अंदर भी सेना का जज्बा आया। 2012 में उसका सेना में चयन हुआ। 2013 अप्रैल में नौकरी शुरू की। 8 मार्च 2018 को उसकी शादी हुई थी।

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