ऑपरेशन से पायी लड़कों सी आवाज

कोटा में ऑपरेशन कर लड़की जैसी आवाज वाले युवक को नई आवाज दी गई है। डॉक्टर ने दावा किया है कि कापरेन के 17 साल के युवक हेमंत ने थाइरोप्लास्टी ऑपरेशन के बाद लड़कों वाली आवाज पा ली है। दसवीं क्लास मे पढ़ने वाले हेमंत की आवाज 8 की उम्र के बच्चों से पतली थी। आमतौर पर 12 साल की उम्र के बाद हार्मोनल बदलाव के चलते लड़कों की आवाज में बदलाव आता है, जो भारी हो जाती है। हेमंत के साथ ऐसा नहीं हुआ। डॉक्टरों ने ऑपरेशन से गले में तीन से 4 सैंटीमीटर का कट लगाकर फ्रीक्वेंसी को बदला गया।

हेमंत के परिजनों ने बताया कि आसपास के बच्चे भी उसकी आवाज को देखकर हंसी उड़ाते थे। कुछ दिन पहले जब हेमंत को खांसी जुकाम हुआ तो उसे स्थानीय डॉक्टर को दिखाया गया। डॉक्टर ने भी उसकी आवाज सुनी तो इस बारे में परिजनों से जानकारी ली। उन्हें बताया कि यह एक बीमारी है। इसका इलाज हो सकता है। हेमंत के परिजन कोटा के डॉक्टर विनीत जैन से मिले। उन्होंने गुरुवार को उसे भर्ती कर ऑपरेशन किया गया और शुक्रवार को ऑपरेशन के बाद छुट्टी दे दी गई। फिलहाल युवक घर पर है।

ईएनटी सर्जन डॉ. विनीत जैन ने बताया कि इस बीमारी को प्यूबरफोनिया कहा जाता है। इस बीमारी में लड़कों की उम्र तो बढ़ जाती है, लेकिन आवाज में जो बदलाव होना चाहिए वह नहीं होता है। इस बीमारी से पीड़ित लड़कों को लगातार पिच टूटने के साथ-साथ आवाज में कंपन की परेशानी होती है। पीड़ित लड़कों को 12 साल की उम्र में स्पीच थेरेपी से ठीक किया जा सकता है। उसके बाद इसका इलाज केवल ऑपरेशन से ही संभव है।

विनीत जैन ने कहा- हालांकि मरीज का चेकअप कर पहले दवाई और थैरेपी से ही कोशिश की। उससे फायदा नहीं होने पर ऑपरेशन करना पड़ा। डॉ. जैन के अनुसार पीड़ित युवक का ऑपरेशन करने में करीब एक घंटा लगा। एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट डॉ आरती गुप्ता का ऑपरेशन के दौरान सहयोग रहा। डॉ. जैन ने कहा कि ऑपरेशन के बाद मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है, उसकी आवाज सामान्य हो गई है। आगे वह अब ठीक रहेगा।

डॉक्टर विनीत जैन ने बताया कि श्वास नली और गले के बीच स्वर यंत्र होता है जो आवाज देने का काम करता है। स्वर यंत्र के तार(कोड) जब स्ट्रेस में होते हैं, यानी तने होते हैं तो आवाज पतली आती है। ऑपरेशन के जरिए इन्हें सामान्य किया जाता है। आवाज की फ्रीक्वेंसी को चेंज किया जाता है। ऑपरेशन से गले में तीन से 4 सैंटीमीटर का कट लगता है। इस ऑपरेशन में कोई बड़ा खतरा नहीं होता। सबसे बड़ी बात यह है कि ऑपरेशन के तुरंत बाद ही मरीज की आवाज में परिवर्तन आ जाता है।

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