पीएमएलएः फैसले के दो बिंदुओं पर होगा पुनर्विचार

सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) पर पूर्व में दिए गए अपने फैसले के दो अहम पहलुओं पर पुनर्विचार की आवश्यकता बताई है। कार्ति चिदंबरम की पुनर्विचार याचिका आज हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि वह पीएमएलए फैसले पर फिर से विचार करने को तैयार है। इस संबंध में उसने केंद्र को नोटिस भी जारी कर दिया।

भारत के चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कार्ति की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के तर्कों के बाद कोर्ट ने कहा कि उसे दो अहम बिंदुओं पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है। ये बिंदु हैं—आरोपी को ईसीआईआर की कॉपी ना देना औऱ दूसरा, दोष सिद्ध होने तक निर्दोष होने की अवधारणा को नकारना।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले में केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले में त्रुटि समीक्षा का आधार नहीं हो सकती है। यह खुद को साबित करने का मसला नहीं है और हम बड़े वैश्विक ढांचे का हिस्सा हैं। इसपर कोर्ट ने कहा, हम मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने या काला धन वापस लाने के लिए सरकार का विरोध नहीं कर रहे हैंय़ ये गंभीर अपराध भी हैं।

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम द्वारा दायर याचिका में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वो पीएमएलए की संवैधानिक वैधता बनाए रखने के अपने फैसले पर फिर से विचार करे। सुप्रीम कोर्ट ने 27 जुलाई को अपने फैसले में ईडी की शक्तियों और अधिकारों को बरकरार रखा था। कोर्ट ने कहा था कि ईसीआईआर प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के समान नहीं है। ये प्रवर्तन निदेशालय का आंतरिक दस्तावेज है। इसकी कॉपी आरोपी को उपलब्ध कराना अनिवार्य नहीं है।

गैर-कानूनी तरीकों से कमाए गए काले धन को कानूनी तरीके से कमाए गए धन में बदलने को मनी लॉन्ड्रिंग कहते हैं। मतलब, अवैध तरीके से कमाए गए धन को छिपाने के लिए उसे व्हाइट मनी में बदलना है। वर्ष 2002 में एनडीए सरकार द्वारा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) पारित किया गया था। इसके बाद 1 जुलाई 2005 में इसे लागू कर दिया गया। इस कानून को लाने का मुख्य उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग पर पूरी तरह से रोक लगाने का है। इसके अलावा, इसके जरिए आपराधिक गतिविधियों में इस काले धन के इस्तेमाल को रोकना है।

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