स्वदेशी हेलीकॉप्टर की पहली तैनाती जोधपुर में

वायुसेना के बेड़े में पहली बार देश में बना लड़ाकू हेलिकॉप्टर शामिल होने जा रहा है। खास बात यह है कि हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर (लाइट कॉम्बेट हेलिकॉप्टर) की पहली स्क्वाड्रन की तैनाती जोधपुर में की जाएगी। एलसीएच हवा से हवा में और हवा से जमीन पर गोलियों से लेकर मिसाइल तक दाग सकता है। दुश्मन के हमले पर यह पायलट व गनर को अलर्ट भी कर देगा।

8 अक्टूबर को वायुसेना दिवस के अवसर पर ये लड़ाकू हेलिकॉप्टर वायुसेना के बेड़े में शामिल हो जाएंगे। एक स्क्वाड्रन में 12 हेलिकॉप्टर होते हैं। एलसीएच का निर्माण हिंदुस्तान एयरनॉटिक्स लिमिटेड (हॉल) की ओर से किया गया है। हालांकि अभी तय नहीं है कि जोधपुर एयरफोर्स में कितने हेलिकॉप्टर शामिल होंगे, लेकिन माना जा रहा है कि करीब 10 हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर मिल सकते हैं।

जोधपुर में इसकी तैनाती के साथ ही पश्चिमी सीमा पर एयरफोर्स की मारक क्षमता काफी बढ़ जाएगी। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अमेरिका में निर्मित लड़ाकू हेलिकॉप्टर अपाचे से कहीं ज्यादा अपग्रेडेड है। जोधपुर में वर्तमान में फाइटर जेट सुखोई की एक स्क्वाड्रन तैनात है। नवनिर्मित फलौदी एयर बेस पर एम-17 के अपग्रेडेड वर्जन के हेलिकॉप्टर की एक स्क्वाड्रन है। ऐसा माना जा रहा है कि एलसीएच की नई स्क्वाड्रन की तैनाती फलौदी में ही की जाएगी।

इस लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर में कई खूबियां हैं। यह वजन में तो हल्का है, लेकिन भारी हथियार ले सकता है। इसके अलावा दिन या रात किसी भी वक्त अपना निशाना भेद सकता है। लेह और लद्दाख जैसे काफी ऊंचाई वाली क्षेत्रों में इसकी मारक क्षमता काफी घातक है। भारतीय सेना और वायुसेना ने एचएएल से ऐसे 160 हेलिकॉप्टर मांगे हैं। डीएसी ने फिलहाल एचएएल को 15 हेलिकॉप्टर तैयार करने को कहा है। इनमें से 10 वायुसेना, जबकि पांच सेना को सौंपे जाने हैं। कीमत समेत खरीद की दूसरी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी हैं।

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