तीस्ता की हिरासत पर जताई हैरानी

गुजरात दंगों से जुड़े साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ की अंतरिम राहत वाली याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा- तीस्ता के खिलाफ न तो यूएपीए और न ही पोटा का केस दर्ज है, फिर भी आपने 2 महीने से उसे हिरासत में रखा हुआ है। शुक्रवार को फिर इस मामले में सुनवाई होगी।

तीस्ता की जमानत का विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामला हाईकोर्ट में है, इसलिए आप वहीं सुनवाई होने दें। मेहता ने कहा, सुप्रीम कोर्ट पूरी तरह आंखें बंद करके न रखे, लेकिन आंखें पूरी खोले भी नहीं। सुनवाई चीफ जस्टिस यूयू ललित की बेंच में हुई। तीस्ता की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल तो गुजरात सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल पेश हुए।

30 अगस्त को गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर तीस्ता की जमानत का विरोध किया था। सरकार ने कहा, तीस्ता के खिलाफ एफआईआर न केवल सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आधारित है, बल्कि सबूतों द्वारा समर्थित है। अब तक की गई जांच में एफआईआर को सही ठहराने के लिए उस सामग्री को रिकॉर्ड में लाया गया है, जो स्पष्ट करती है कि आवेदक ने राजनीतिक, वित्तीय और अन्य भौतिक लाभ प्राप्त करने के लिए अन्य आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक कृत्य किए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगों के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने वाली एसआईटी रिपोर्ट के खिलाफ याचिका को 24 जून को खारिज कर दिया था। याचिका जकिया जाफरी ने दाखिल की थी। जकिया जाफरी के पति एहसान जाफरी की इन दंगों में मौत हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जकिया की याचिका में मेरिट नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि मामले में को-पेटिशनर सीतलवाड़ ने जकिया जाफरी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। कोर्ट ने तीस्ता की भूमिका की जांच की बात कही थी, जिसके बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने 25 जून को तीस्ता को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया था।

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