भारतीय महिलाओं को शेयर नहीं, बचत पर यकीन

भारत में महिलाएं लगभग सभी सेक्टरों में बड़ी संख्या में काम करती है, लेकिन शेयर बाजार और अन्य प्रकार के निवेश में उनकी भागीदारी अब भी बहुत कम है। सामान्यत: देखा जाता है कि महिलाओं में बचत की अच्छी आदत होती है। वे चीजों को परखकर उसे गहनता में समझने का प्रयास करती हैं। मगर हाल के एक सर्वे से यह पता चला है कि भारत में 33 फीसदी महिलाएं किसी तरह का निवेश नहीं करती हैं। 21 से 25 उम्र के वर्ग में तो यह आंकड़ा 40 फीसदी है। यह बात लक्समे द्वारा एक्सिस माय इंडिया के साथ मिलकर किए गए सर्वे में सामने आई है।

सर्वे में बताया गया है कि देश में 55 फीसदी महिलाओं को निवेश के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। ज्यादातर महिलाएं सिर्फ बचत करती हैं, लेकिन निवेश में उनकी भागीदारी कम देखी जाती है। कंपनियों में बड़ी जिम्मेदारियां संभालने वाली महिलाएं भी रोजमर्रा के कामों, घर और बच्चों की चिंता में उलझे रहने के कारण निवेश जैसे अहम पहलू पर ध्यान नहीं दे पाती हैं।

भारत में जो महिलाएं निवेश करती हैं, उनमें से ज्यादातर सोने के गहनों, बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट, पीपीएफ, एन्डॉमेंट पॉलिसीज जैसे पारंपरिक उत्पादों में ही निवेश करती हैं। इस सर्वे में 42 फीसदी महिलाओं ने माना है वे सोने के गहनों में निवेश करना पसंद करती हैं। 35 फीसदी महिलाओं का कहना है कि वे बैंक एफडी में पैसे लगाती हैं। इससे यह स्पष्ट है कि पैसे को मंहगाई के असर से बचाने और सम्पत्ति बढाने के लिए वे कुछ नहीं करती हैं। सोने के गहनों और बैंक एफडी जैसे निवेशों से मिलने वाला रिटर्न सालाना 5-6 फीसदी से ज्यादा नहीं होता। पिछले एक दशक में औसत मंहगाई 6.5 फीसदी रही है। इससे स्पष्ट है कि महिलाओं को अपने निवेश पर सकारात्मक रिटर्न नहीं मिल रहा है। वहीं, पिछले 126 साल का इतिहास बताता है कि शेयर अकेला ऐसा एसेट हैं, जिसका प्रदर्शन दूसरे एसेट क्लास के मुकाबले बहुत अच्छा रहा है।

मगर भारत के शेयर बाजार में महिलाओं की भागीदारी कम, पुरुषों की ज्यादा है। भारत का शेयर बाजार दुनिया का छठा सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है, लेकिन इसमें महिलाओं की भागीदारी केवल 21 फीसदी है। इस तरह से भारत में हर 100 निवेशकों में से सिर्फ 21 महिलाएं हैं। दुनिया के बाकी उभरते बाजारों वाले देशों में यह आंकड़ा भारत की तुलना में अच्छा है। चीन में यह 34 फीसदी, दक्षिण अफ्रीका में 33 फीसदी और मलेशिया में 29 फीसदी है। शेयर बाजार और बाकी तरह के निवेश में महिलाओं की भागीदारी कम होने की कई वजहें हैं। इनमें घर की जिम्मेदारियों को संभालने के कारण समय की कमी, वित्तीय समझ न होना और पैसों के डूबने का डर आदि शामिल हैं।

बचत के मामले में महिलाएं दूसरों की मदद लेने से भी बचती हैं। वे गहने बनवाने के लिए मेकिंग चार्ज भी देती हैं। बैंक में लॉकर की फीस चुकाती हैं। कम इंटरेस्ट वाले बैंक एफडी में निवेश करती हैं। लेकिन वे ऐसे एक्सपर्ट को फीस नहीं देना चाहतीं, जो शेयरों में निवेश करने में उनकी मदद करे।

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