समारोह में उर्दू शिक्षक संघ अध्यक्ष का हंगामा

राजस्थान के राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला की मौजूदगी में हंगामा हो गया। कल्ला के संबोधन के दौरान उर्दू शिक्षक संघ के अध्यक्ष अमीन कायमखानी ने मंच पर जाकर प्राथमिक शिक्षा में उर्दू शिक्षक लगाने की मांग रखी। वहां कोई जवाब नहीं मिला तो सीट पर खड़े होकर मुख्यमंत्री की बजट घोषणा की पालना करवाने की मांग को लेकर चिल्लाना शुरू कर दिया।

एकाएक हुए हंगामे से शिक्षा मंत्री कल्ला, राज्यमंत्री जाहिदा खान और राज्यमंत्री राजेन्द्र सिंह यादव चौंक गए। वहां मौजूद स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों में भी कार्यक्रम बिगड़ने के डर से खलबली मच गई। हंगामा बढ़ते देख पुलिस ने कायमखानी को हिरासत में लिया और अशोक नगर थाने ले गई। समारोह जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में सोमवार को आयोजित हुआ।

शिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तारीफ करते हुए मौजूदा सरकार में शिक्षा का स्तर सुधरने की बात कही। इस बीच कायमखानी ने हंगामा करते हुए कहा- मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की 2021 की बजट घोषणा के बावजूद प्राथमिक स्तर की उर्दू शिक्षा बहाल क्यों नहीं की गई है ?

हंगामा बढ़ते देखकर कायमखानी को मौजूद लोग पकड़कर सभागार से बाहर ले गए। बाहर भी काफी देर तक कायमखानी हंगामा करते रहे। उन्होंने मंत्री कल्ला और अधिकारियों पर सरकार और अल्पसंख्यकों के खिलाफ काम करने के आरोप लगाया। यहां तक कहा कि सारे नौकरशाह संघी हैं।

बाद में अमीन कायमखानी ने बताया, समारोह में जब शिक्षा मंत्री कामों का बखान कर रहे थे, तो मैंने मंत्री कल्ला से कहा- उर्दू तालीम से संबंधित मुख्यमंत्री की बजट घोषणा की पालना करवा दो। इस पर मुझे बीकानेर के साजिद कुरैशी धक्का मारकर बिड़ला ऑडिटोरियम से बाहर ले गया। बदसलूकी की गई है। वो टीचर नहीं है, कांग्रेस पार्टी का कार्यकर्ता है। जिस तरह का व्यवहार किया गया इससे उर्दू शिक्षकों में आक्रोश है। मैं ऑन ड्यूटी था, अपनी मांग रख रहा था। तब मंत्री के इशारे से उनके विधानसभा क्षेत्र और बीकानेर से बाहरी गुंडों ने मुझ पर हमला किया है। ऑडिटोरियम से बाहर निकाला है। मंत्री और उनके ब्यूरोक्रेट्स ने गलत रवैया अपना रखा है। सरकार की गुड गवर्नेंस की जगह अल्पसंख्यकों में गलत मैसेज देना चाहते हैं। ये सरकार के खिलाफ काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 1-5 वीं क्लास में उर्दू की पढ़ाई नहीं करवाई जा रही है। 6 से 10 वीं तक तृतीय भाषा पढ़ाई जा रही है। उसमें भी मैपिंग में भेदभाव हो रहा है। तृतीय भाषा के 444 पद बढ़ाकर 1000 पद करने की घोषणा की गई थी, लेकिन सिर्फ पद अलॉटमेंट कर खानापूर्ति की गई है। नियुक्तियां नहीं दी गई हैं। गेस्ट फैकल्टी के तौर पर भी उर्दू शिक्षक नहीं लगाए जा रहे हैं।

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