अभी अधिकार बरकरार, आगे पता नहीं–राज्यपाल

राज्यपाल कलराज मिश्र ने आज अपने तीन साल के कार्यकाल की जानकारी देने के लिए मीडिया को आमंत्रित किया, लेकिन उनके सम्बोधन में राजस्थान से उनकी बिदाई के संकेत मिले। उन्होंने कहा, दिसम्बर 2019 में कार्यभार ग्रहण करने के बाद तीन साल कैसे निकल गए, पता ही नहीं चला। राजस्थान से निकटता का नाता रहा है। प्रदेशवासियों से मिले प्यार से लगने लगा है कि मैं भी राजस्थान का ही हूं।

महामहिम ने पहले पत्रकारों को अपने तीन वर्षों के कार्यों के बारे में विस्तार से बताया, फिर बातचीत में विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कुछेक राज्यों में राज्यपालों के अधिकारों में कटौती को लेकर पूछे सवाल पर कहा, अभी राजस्थान में वे ही सरकारी विश्वविद्यलयों के कुलाधिपति हैं। यहां फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं बनी है, आगे भविष्य का कुछ पता नहीं। वर्तमान में वह राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाकर कार्य कर रहे हैं।

भारत के शिक्षण संस्थाओं के दुनिया के टॉप 100 में नहीं होने पर कहा, राजस्थान के उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढावा देने के लिए श्रेष्ठ विश्वविद्यालय हेतु कुलाधिपति अवार्ड शुरूआत की गई है। इससे शिक्षण संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धी माहौल बनेगा और संस्थानों के स्तर में सुधार की राह बनेगी। इससे पहले राज्यपाल मिश्र ने संविधान पार्कों के निर्माण, जनजातीय क्षेत्र में हुए विकास कार्यों, पूर्व सैनिकों के लिए कल्याणकारी निर्णयों के बारे में जानकारी दी। भावी योजनाओं पर चर्चा करते हुए उन्होने बताया कि राजभवन में ऑनलाइन स्वागत सॉफ्टवेयर स्थापित होगा। विश्वविद्यालयों के सुव्यवस्थित प्रबंधन के लिए स्टेट यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम लागू होगा। गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए ई-समीक्षा तंत्र विकसित होगा। जनजातीय क्षेत्र के 49 गांव आदर्श ग्राम के रूप में विकसित होंगे। भूतपूर्व सैनिकों तथा उनके आश्रितों के लिए जयपुर में सैनिक कल्याण भवन बनवाया जाएगा। ताकि उनकी समस्याओं के निराकरण में तेजी लाई जा सके। उनको लाभान्वित करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की जाएगी। 

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