मैटिक्स की उर्वरक क्षेत्र में जमी धाक

भारत के सबसे तेजी से बढ़ती उर्वरक कंपनी मैटिक्स फर्टिलाइजर्स एंड कैमिकल्स लिमटेड के चेयरमैन निशांत कनोडिया ने उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में पूर्वी भारत, देश में उर्वरकों की मांग बढाने वाला विकास इंजन होगा।

मैटिक्स कंपनी के पहला साल पूरा करने के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कनोडिया ने कहा,  पूर्वी भारत में उर्वरकों की खपत लगभग 158.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है, जो उत्तर भारत की 212.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर खपत के मुकाबले बहुत कम है। चूंकि फसल पोषक तत्वों की मांग केवल इस क्षेत्र में बढ़ सकती है इसलिए पूर्वी भारत मैटिक्स को इस अल्प.सेवित बाजार को विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।

इस अवसर पर कंपनी के प्रबांध ननदेशक मनोज मिश्र ने कहा, मैटिक्स के पास पूर्वी भारत के कृषि क्षेत्र को हमारी विनिर्माण सुविधा का लोकेशन या स्थान का लाभ है। छह कृषि प्रधान राज्यों में मैट्रिक्स के लगभग 700 डीलर्स को मैट्रिक्स के यूरिया संयंत्र से सेवा दी जाती है। मैटिक्स के मजबूत वितरण नेटर्वक का फोकस भी देश के पूर्वी क्षेत्र पर होने के कारण हम इल क्षेत्र के राज्यों में किसानों की सेवा करने के लिए सबसे अच्छी स्थित में हैं।

मैटिक्स संयंत्र अक्टूबर 2021 में चालू हुआ था। यह पूरी तरह से एकीकृत गैस आधारित भारत के सबसे बडे सिंगल स्ट्रीम उर्वरक संयंत्रों में से एक है। संयंत्र की उत्पादक क्षमता 1.27 मिलियन टन प्रति वर्ष है। इस यूरिया संयंत्र के लिए प्रौद्योगिकी विश्व की अग्रणी कंपनियों से हासिल की गई है। केबीआर, अमरीका से अमोनिया के लिए और सैपम, इटली से यूरिया तकनीक ली गई है।

कंपनी के बारे में–

मैटिक्स मैटिक्स फर्टिलाइजर्स एंड  कैमिकल्स लिमिडेड का एकीकृत, गैस आधारित यूरिया संयंत्र पश्चिम बंगाल के पानागढ में स्थित है। इसकी 1.27 एमटीपीए क्षमता भारत में बड़े सिंगल स्ट्रीम उर्वरक संयंत्रों में से एक बनाती है। कंपनी की ‘डॉ. फसल’ ब्रांड, पूर्वी भारत के बाजारों की अग्रणी यूरिया खाद है, जो लगभग 700 डीलरों के मजबूत वितरण नेटर्वक से मजबूत पाती है।

संयंत्र में लगभग 500 एकड़ के परिसर में 54 मेगावाट क्षमता की अपनी बिजली उत्पादन इकाईहै। इसके अलावा  दोहरे रेक वाली रेलवे साइडिंग और अन्य उपयोगिताएँ हैं।

कंपनी का भारत की सबसे बड़ी गैस आपूर्ति कंपनी-गेल के साथ दीर्घकालिक गैस आपूर्ति समझौता है। संयंत्र को ग्रीन-फील्ड परियोजना के रूप में कवर किया गया है।

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