कन्हैया के दुकान पर लाए गए हत्यारे

उदयपुर के चर्चित कन्हैयालाल साहू हत्याकांड में आज सुबह पांच बजे दोनों हत्यारों को वारदात वाली जगह पर लाया गया। कन्हैयालाल की दुकान के बाहर एनआईए की टीम ने दोनों हत्यारों रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद से पूछताछ की।

उदयपुर की मालदास स्ट्रीट स्थित कन्हैयालाल की दुकान वाले क्षेत्र में शुक्रवार आधी रात के बाद से ही पुलिस की गहमा-गहमी शुरू हो गई थी। आम आदमी को जानकारी नहीं थी कि क्या होने वाला है। अचानक सुबह करीब पांच बजे एनआईए की विशेष टीम और बड़ी संख्या में स्थानीय पुलिस की गाड़ियां यहां पहुंची। मौके पर सीन तो रिक्रिएट नहीं किया गया, लेकिन 25 मिनट दोनों से पूछताछ की गई।

इससे पहले शुक्रवार देर रात करीब 11 बजे एनआईए की टीम दोनों आरोपियों को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल से लेकर उदयपुर पहुंची थी। यहां उन्हें भूपालपुरा थाने में रखा गया था। दोनों हत्यारों को मालदास स्ट्रीट और भूतमहल गली के पास बापर्दा गाड़ी में ही बिठाए रखा। यहां आरोपियों से रूट से लेकर घटनास्थल की मार्किंग कराई गई। इस दौरान एनआईए एसपी रवि कुमार समेत कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। पूछताछ के दौरान सामने आई बातों को एक डायरी में नोट किया गया।

एहतियात के तौर पर उदयपुर पुलिस से भूपालपुरा और हाथीपोल थानाधिकारी मौके पर मौजूद थे। जिस फैक्ट्री में दोनों ने वीडियो बनाए थे, उस फैक्ट्री में भी टीम रियाज और गौस को लेकर जाने की सूचना है। इस साल 28 जून को कन्हैयालाल हत्या के बाद से आरोपियों को अब तक टीम मौके पर लेकर नहीं गई थी।

हत्यारों को उदयपुर लाने से पहले ही थाने के बाहर सुरक्षाकर्मी तैनात थे। उदयपुर पुलिस के अधिकारी देर रात तक इस मामले पर कुछ भी बोलने से बचते रहे। शहर के सभी थाना इलाकों में पुलिस ने सख्त नाकाबंदी की थी। एक-एक वाहनों की सख्ती से चेकिंग की जा रही थी। 28 जून को दोपहर 2.45 बजे उदयपुर के मालदास स्ट्रीट में सुप्रीम टेलर्स के संचालक कन्हैयालाल साहू की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। मोहम्मद गौस और रियाज अत्तारी ने हत्या का लाइव वीडियो बनाया। साथ ही हत्या की जिम्मेदारी लेने का भी वीडियो बनाया। अब तक इस मामले में 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया। हत्याकांड के सभी आरोपी जेल में है।

इसबीच, कन्हैयालाल साहू के बेटे यश ने कहा है कि गुनहगारों को फांसी की सजा मिलने तक नंगे पैर ही रहेगा। यश कन्हैयालाल का बड़ा बेटा है। उसका कहना है कि 29 जून को पिता की चिता को मुखाग्नि देने के साथ ही अपने मन में एक संकल्प लिया कि जब तक हत्यारों को फांसी की सजा नहीं होगी, तब तक वह जूत- चप्पल नहीं पहनेगा।

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