वसुंधरा ने फिर दिखा दी ताकत

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का बीकानेर दौरा चर्चा में आ गया है। उनका यह दौरा पार्टी की तरफ से घोषित कार्यक्रम नहीं था। वसुंधरा ने इसे देव दर्शन के लिए निजी यात्रा बताई थी। मगर विश्नोई समाज के मुकाम और करणी माता मंदिर में दर्शन के साथ राजे ने अपनी राजनीतिक क्षमता का भी शक्ति प्रदर्शन कर दिया।

वसुंधरा ने नोखा, देशनोक और बीकानेर शहर में सभाएं कीं, जिनमें उनके भाषण से भाजपा में हलचल मच गई है। समर्थकों की भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, मेरा कोई भी काम सीधे-सीधे नहीं होता, संघर्ष करना पड़ता है। अब मुहर लग गई है। अब कोई रोक नहीं सकता। माना जा रहा है कि वसुंधरा ने रविवार सुबह देशनोक में करणी माता मंदिर में धोक लगाकर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए शंखनाद कर दिया। देशनोक में उन्होंने कहा भी कि यहां से शंखनाद कर दिया है कि आने वाला समय कैसा होगा। यह बात जयपुर तक जरूर पहुंचेगी।

वसुंधरा के कार्यक्रम से बीकानेर भाजपा संगठन पूरी तरह से दूर रहा, लेकिन जिस मकसद को राजे हासिल करना चाहती थीं, वो इस दौरे ने पूरा कर दिया। मकसद था- आने वाले विधानसभा चुनाव में खुद को मुख्यमंत्री की दौड़ में होने का संदेश देना। साथ ही यह बताना कि उनके सामने बाकी चेहरे कोई खास मायने नहीं रखते। वसुंधरा ने केंद्रीय नेतृत्व से लेकर स्थानीय संगठन तक यह बात पहुंचा दी कि उनका अभी भी प्रदेश के सुदूर इलाकों में दबदबा कायम है। उनके लिए समर्थकों की फौज हर जगह तैयार है।

बीकानेर दौरे की तरह ही वसुंधरा ने कोटा संभाग के केशोरायपाटन में गत 8 मार्च को अपने जन्मदिन पर धार्मिक यात्रा निकाली थी। वहां उन्होंने भाजपा के 100 से ज्यादा मौजूदा और पूर्व विधायकों-सांसदों को इकट्‌ठा करके सबको चौंका दिया था। मौके पर हुई सभा में कांग्रेस सरकार को महिला अपराधों पर घेरा था।

राजे जब 2003 में पहली बार मुख्यमंत्री बनी थीं, तब भी उन्होंने चुनाव से पहले प्रदेश में साल भर तक परिवर्तन यात्रा निकाली थी। उसके बाद जब वे 2013 में मुख्यमंत्री बनीं तब भी उन्होंने ‌चुनाव से पहले प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सुराज संकल्प यात्रा निकाली थी। राजे की राजनीति को समझने वालों के अनुसार वो यात्राओं के जरिए राजनीति का तापमान नापती हैं। ये यात्राएं उनके लिए पॉलिटिकल थर्मामीटर का काम करती हैं। वे यात्रा के दौरान लोगों से संवाद करती हैं। स्थानीय मुद्दों को समझती हैं। समस्याओं पर बात करती हैं और उनसे मिलने आने वाले सांसदों-विधायकों या पूर्व सांसदों-विधायकों के माध्यम से खुद के प्रति माहौल को भांपती हैं, जो आगे रणनीति बनाने में उनके लिए मददगार साबित होता है। इस बार भी देव दर्शन यात्राएं उनके लिए इसी तरह का थर्मामीटर का काम कर रही हैं।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.