पिता के बाद पुत्र बनेंगे सीजेआई

भारत के मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ के नाम की सिफारिश की है। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ 9 नवंबर को भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे। उनका कार्यकाल दो साल से अधिक का होगा। सीजेआई यूयू ललित ने केंद्र सरकार को उसके पत्र का जवाब भेज दिया है, जिसमें सरकार ने उनसे अगले सीजेआई के नाम के बारे में पूछा था।

जस्टिस यूयू ललित 8 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। 9 नवंबर को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ देश के 50 वें मुख्य नयायाधीश के तौर पर शपथ लेंगे और 10 नवंबर 2024 को रिटायर होंगे। प्रोटोकॉल के अनुसार मौजूदा सीजेआई को सरकार को अपने उत्तराधिकारी की सिफारिश करने वाला एक औपचारिक पत्र भेजना होता है। फिर यह पत्र अगले सीजेआई को सौंप दिया जाता है और कानून मंत्री को भेजा जाता है। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने 1998 में भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में कार्य किया है। उन्होंने 2013 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। वह बॉम्बे उच्च न्यायालय से भी जुड़े रहे हैं और उन्हें 2016 सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था।

जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ देश के 16वें सीजेआई थे। उनका कार्यकाल 22 फरवरी, 1978 से 11 जुलाई, 1985 तक यानी करीब 7 साल का रहा। पिता के रिटायर होने के 37 साल बाद अब उनके बेटे उसी पद पर बैठेंगे। जस्टिस चंद्रचूड़ पिता के 2 बड़े फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में पलट भी चुके हैं। वह बेबाक फैसलों के लिए चर्चित हैं। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल 9 नवंबर, 2022 से 10 नवंबर, 2024 तक यानी 2 साल का होगा।

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