गांगुली से पद छीना, टीएमसी भड़की

सौरव गांगुली के सितारे एकबारगी गरदिश में दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने जिस भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को बतौर अध्यक्ष 3 साल तक चलाया, अब उनके ही साथी उन्हें मुखिया की कुर्सी से उन्हें हटाना चाहते हैं। दादा चाहते थे कि उन्हें एक बार फिर बीसीसीआई का अध्यक्ष बनाया जाए, लेकिन बोर्ड के अन्य पदाधिकारियों ने उन्हें सिरे से खारिज कर दिया।

मुंबई में मंगलवार को बीसीसीआई हेड क्वार्टर में हुई बैठक में पूरे देश के क्रिकेट संघ के अधिकारी आए हुए थे। बीसीसीआई का नियम है कि पुराना अध्यक्ष ही नए अध्यक्ष का नाम प्रस्तावित करता है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि गांगुली ने ये नहीं किया। वो दूसरी बार बीसीसीआई अध्यक्ष बनना चाहते थे, लेकिन लोग उनके समर्थन में नहीं आए। ऐसे में उन्होंने अपनी नाराजगी छिपाने की कोई कोशिश भी नहीं की।

गांगुली को बीसीसीआई अध्यक्ष पद से हटाकर आईपीएल चेयरमैन पद का ऑफर किया गया। ये एक तरह से उनके लिए डिमोशन था। गांगुली तो ठहरे प्रिंस ऑफ कोलकाता, वो इसे कैसे स्वीकार कर सकते थे। उन्होंने कहा कि बीसीसीआई अध्यक्ष पद से हटने के बाद कहा, मैं उसकी किसी उपसमिति का अध्यक्ष नहीं बन सकता।

गांगुली को बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से हटने पर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच राजनीति शुरू हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के राज्य महासचिव और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि गांगुली बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में मौजूद हैं और एक भाजपा नेता के बेटे के रूप बोर्ड सचिव पद पर रहना सही नहीं है। उन्होंने कहा, केवल सौरव गांगुली ही इस मामले में उत्तर दे सकते हैं। एक समय ऐसा भी था, जब भाजपा ने पूरे क्षेत्र में एक संदेश फैलाने की कोशिश की थी कि सौरव गांगुली जल्द ही भाजपा के साथ होंगे। यह संदेश एक भाजपा नेता के आवास पर रात्रि भोज के बाद फैलाया गया था।

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य, डॉ शांतनु सेन ने भी एक ट्विटर संदेश जारी कर संकेत दिया है कि गांगुली का बीसीसीआई से बाहर होना शायद इसलिए है, क्योंकि या तो वह तृणमूल कांग्रेस शासित राज्य से हैं या इसलिए कि वह भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं। इसपर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व राज्य इकाई प्रमुख, दिलीप घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी के नेताओं द्वारा ये निराधार राजनीतिक आरोप हैं। उन्होंने कहा, यह कोई जानकारी नहीं है कि हमारी पार्टी ने सौरव गांगुली से संपर्क किया था। तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे पर अनावश्यक बातें कर रही है।

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