खूब बिक रहे नकली चांदी के सिक्के

दिवाली के इस मौके पर बाजार में चांदी के सिक्कों के हूबहू नकली सिक्के बन और बिक रहे हैं। महज 400 रुपए किलो वाली गिलट धातु और एक हजार रुपए किलो वाले जर्मन सिल्वर से इन सिक्कों को तैयार कर बाजार में बेचा जा रहा है। मात्र 18 रुपए के इन खोटे सिक्कों की 550 रुपए तक बेचा जा रहा है। मतलब, इनकी कीमत 55 हजार रुपए किलो वाली चांदी की वसूली जा रही है।

चांदी में मिलावट कर नकली सिक्के बनाने और बेचने का ये खेल राजस्थान के जयपुर, अजमेर, कोटा और जोधपुर जैसे बड़े शहरों में धड़ल्ले से हो रहा है। इन दिनों ऐसी कई फैक्ट्रियों में सिक्के ढालने की बड़ी-बड़ी मशीनों पर दिन-रात सैकड़ों किलो नकली चांदी के सिक्के ऑर्डर पर तैयार हो रहे हैं। यहां से बने सिक्के ज्वेलरी शोरूम और छोटे व्यापारियों के जरिए आपके घर में पूजा की थाली तक पहुंच रहे हैं।

इन सिक्कों को यदि लैब में टेस्ट करवाया जाए तो ये फेल ही होंगे, लेकिन ग्राहक को यकीन दिलाने के लिए दुकानदार चांदी की शुद्धता वाला सर्टिफिकेट भी देंगे। जयपुर के एक ज्वैलर ने बताया कि ग्राहक को संतुष्ट करने के लिए उसके पास चांदी की क्वालिटी जांचने की मशीन है। जिससे तैयार सर्टिफिकेट, हूबहू हॉलमार्क की तरह लगता है। इसे दिखाकर कस्टमर को भी आसानी से भरोसे में लिया जा सकता है। मिलावटी चांदी के सिक्के ज्यादातर कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों में बेचे जाते हैं। अधिकतर लोग लक्ष्मी पूजन के लिए सिक्के लेते हैं और फिर अंदर पैक करके अच्छे से रख देते हैं। तीन-चार साल बाद उस सिक्के का रंग जब कुछ गड़बड़ लगता है, तब लोगों को शक होता है, लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है।

खोटे सिक्के चांदी में 30 से 40 फीसदी तक गिलट या जर्मन सिल्वर मिक्स कर तैयार किए जाते है। ऐसे सिक्कों के असल चांदी के बराबर 55 हजार से 57 हजार रुपए के भाव लिए जाते हैं। इससे मोटा मुनाफा होता है।

इसके अलावा 99.99 फीसदी सिक्के गिलट या जर्मन सिल्वर से तैयार किए जाते हैं, लेकिन चमकदार दिखाने के लिए इन पर चांदी की पॉलिश कर दी जाती है। 800-900 रुपए किलों की लागत के बाद तैयार नकली सिक्कों को बाजार में असली चांदी के सिक्कों के बीच मिक्स कर आसानी से 55 हजार से 57 हजार रुपए के भाव से बेचा जाता है।

ज्वेलरी का बिजनेस हमेशा से ही विश्वास पर होता आया है, लेकिन शहर में कई ज्वैलर सोने-चांदी की खरीद में घालमेल कर रहे हैं। इस ठगी को जांचने और रोकने का कोई तरीका नहीं है। हालत ये है कि 65, 70 व 80 फीसदी शुद्धता की चांदी आती है और दुकानदार कीमत 100 फीसदी की लेते हैं। उसके ऊपर से मेकिंग चार्ज अलग से लिया जा रहा है। (साभार–भास्कर)

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