मां छोटे भाई को करती प्यार..मैं जा रहा

कोटा में एक 10 साल का मासूम मां की डांट से आहत होकर घर से निकल गया। जाते वक्त वह एक चिठ्ठी छोड़ गया, जिसमें उसने लिखा–मां, मैं घर छोड़कर जा रहा हूं, क्योंकि आप सब सिर्फ छोटे भाई को प्यार करते हैं। मेरा कोई ध्यान नहीं रखता। मैं खुद जिंदगी जी सकता हूं।

बच्चे की मां रेणुका वर्मा कोटा में जीएसटी डिपार्टमेंट में डिप्टी कमिश्नर है। बच्चे ने मां से नाराज होकर यह चिट्‌ठी लिखी। उसकी शिकायत थी कि मां छोटे भाई को ज्यादा प्यार करती है और उसे सिर्फ डांटती है। हालांकि घर छोड़ने के करीब 12 घंटे बाद बच्चा कोटा से 300 किमी दूर रतलाम में मिल गया।

जब बच्चा घर से निकला था, उस समय मां बाहर गई थी। शनिवार सुबह आरकेपुरम थाना इलाके में स्थित घर में जब मां को बेटे की यह चिट्‌ठी मिली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन-फानन में उन्होंने अपने परिचितों को इसकी जानकारी दी। बच्चे को ढूंढना शुरू किया गया, सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर की गई। बच्चे के बारे में सूचना मिलने पर पुलिस भी सक्रिय हुई और उसे ढूंढने में जुट गई।

चौथी क्लास में पढ़ने वाला मासूम सुबह करीब 10 बजे घर से निकला था। पुलिस ने सीसीटीवी और अन्य जानकारियां जुटाई तो पता चला कि एक बच्चा मुंबई जाने वाली ट्रेन में बैठा है। इस पर पुलिस ने बच्चे से जुड़ी जानकारी रास्ते में पढ़ने वाले स्टेशनों पर भेजी। 12 घंटे बाद रात करीब 10 बजे बच्चा रतलाम में ट्रेन में बैठा मिला।

बच्चे की मां जीएसटी में डिप्टी कमिश्नर के पद पर काम कर रही हैं। पिता सेना में थे, लेकिन कुछ महीने पहले उनका देहांत हो चुका है। छोटा भाई 5 साल का है। वो आरकेपुरम इलाके में मल्टी में रहते हैं। आरकेपुरम थाना सीआई अनिल जोशी ने बताया कि बच्चा रतलाम से मिला है। परिवार वालों ने मामले में एफआईआर दर्ज नहीं करवाई है।

बच्चे को रतलाम से लाने वाले एसआई गिर्राज सिंह ने बताया कि 10 साल के बच्चे और उसके छोटे भाई के बीच झगड़ा हुआ था, इस पर मां ने उसे डांट दिया था। बच्चे गुम होने की सूचना पर पुलिस ने अभय कमांड सेंटर व आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। अधिकारियों ने नजदीकी जिलों में सूचना दी। बच्चे की पहली लोकेशन चंबल गार्डन में मिली, फिर वहां से रेलवे स्टेशन की लोकेशन आई। इसके बाद फोटो के आधार पर जीआरपी ने ट्रेनों में बच्चों को ढूंढा। कोटा पुलिस भी लोकेशन के आधार पर पीछे-पीछे रवाना हुई। बच्चा रतलाम में सकुशल मिला। वो गुमसुम था। उसे रात को ही लेकर कोटा रवाना हुए। सुबह घर पहुंचते ही बच्चा मां से लिपट गया।

कोटा मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्रोफेसर मनोचिकित्सक डॉ. सीएस सुशील ने बताया कि दो बच्चों के बीच फर्क करने पर अक्सर उनके मन में ऐसा विकार आ जाता है। ऐसे में कई बार बच्चा उदासी, डिप्रेशन व अकेलापन का शिकार हो जाता है। उसको ऐसा लगता है कि इस परिवार में रहने का मतलब नहीं है। ऐसे बच्चे खतरनाक कदम उठा लेते हैं।

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