ईडब्लूएस आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट की ‘खंडित’ मंजूरी

आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुहर लगा दी। इस फैसले का फायदा सामान्य वर्ग के लोगों को शिक्षा और सरकारी नौकरी में मिलेगा। 5 न्यायाधीशों में से 3 ने इकोनॉमिकली वीकर सेक्शंस (ईडब्लूएस) रिजर्वेशन पर सरकार के फैसले को संवैधानिक ढांचे का उल्लंघन नहीं माना। मतलब अब यह आरक्षण जारी रहेगा।

सीजेआई यूयू ललित, जस्टिस बेला त्रिवेदी, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस रवींद्र भट की पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने इस पर फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस और जस्टिस भट्ट ईडब्लूएस के खिलाफ रहे, जबकि जस्टिस माहेश्वरी, जस्टिस त्रिवेदी और जस्टिस जेबी पारदीवाला ने पक्ष में फैसला सुनाया। इस फैसले के अनुसार सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में 10 प्रतिशत का आरक्षण बरकरार रहेगा। इस मामले में 30 से ज्यादा याचिकाएं डाली गई थीं, जिस पर 27 सितंबर को सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला आज 7 दिसम्बर के लिए सुरक्षित रख लिया था। फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 103वें संविधान संशोधन को सही बताया।

न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी ने अपने फैसले में कहा कि आर्थिक मापदंड को ध्यान में रखते हुए ईडब्ल्यूएस आरक्षण संविधान के बुनियादी ढांचे या समानता के अधिकार का उल्लंघन नहीं करता। ईडब्ल्यूएस आरक्षण, कोटे की 50 प्रतिशत की सीमा सहित संविधान की किसी भी आवश्यक विशेषता को क्षति नहीं पहुंचाता, क्योंकि कोटे की सीमा पहले से ही लचीली है। न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी ने न्यायमूर्ति माहेश्वरी के विचारों से सहमत होते हुए कहा कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण वैध है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला ने भी ईडब्ल्यूएस आरक्षण के पक्ष में फैसला सुनाया।

लेकिन मुख्य न्यायाधीश यू.यू. ललित और न्यायमूर्ति भट ने पीठ के अन्य तीन न्यायाधीशों के फैसलों से असहमति जताई। मुख्य न्यायाधीश यू.यू. ललित और न्यायमूर्ति भट ने कहा कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण भेदभावपूर्ण और संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कानून का समर्थन करते हुए कहा था कि यह कानून अत्यंत गरीबों के लिए आरक्षण का प्रावधान करता है। इस लिहाज से यह संविधान के मूल ढांचे को मजबूत करता है। यह आर्थिक न्याय की अवधारणा को सार्थक करता है। इसलिए इसे मूल ढांचे का उल्लंघन करने वाला नहीं कहा जा सकता।

पुनर्विचार याचिका—सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले के बाद याचिकाकर्ताओं के वकील वरुण ठाकुर ने कहा कि वह रिव्यू पिटीशन दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा, तीन जजों ने 103वें संविधान संशोधन को सही माना, जबकि 2 जजों ने संशोधन को सही नहीं माना है। इसी आधार पर रिव्यू पिटीशन दाखिल करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत तरीके से इस पूरे मामले को सुना और अपना आदेश दिया। ईडब्लूएस कोटे को असंवैधानिक करार देने वाले दो जजों ने जो टिप्पणियां की हैं, हम रिव्यू पिटीशन में वे मुद्दे शीर्ष अदालत के समक्ष रखेंगे।

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