माउंट आबू में गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड

राजस्थान में नवंबर महीने में हो रही बारिश और पड़ रही गर्मी रिकॉर्ड बना रही है। जयपुर में पिछले दो दिन में हुई बारिश 11 साल में सबसे ज्यादा है। वहीं हिल स्टेशन माउंट आबू 10 साल में सबसे गर्म रहा। शुक्रवार को 6 शहरों में कोहरा छाया रहा। अब अगले 5 दिन तक राज्य में मौसम साफ रहने की संभावना है।

जयपुर मौसम केन्द्र के अनुसार 15 नवंबर तक प्रदेश में कोई भी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आने के आसार नहीं है। हालांकि इस दौरान उत्तरी हवाओं का तेज बढ़ जाएगा, जिससे उत्तरी राजस्थान के हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, चूरू, सीकर, झुंझुनूं में दिन और रात के तापमान में गिरावट होगी और सर्दी का असर बढ़ेगा। हालांकि स्थानीय स्तर पर नमी का स्तर बढ़ने से जयपुर, सीकर के आसपास हल्के बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन बारिश होने की संभावन कम है।

जयपुर में गुरुवार को 15 और बारां जिले के अंता में 13.5 एमएम बारिश हुई। जयपुर में करीब आधे घंटे तक तूफानी बारिश हुई, जिसके बाद शहर में जगह-जगह पानी भर गया। वहीं गुरुवार की बारिश ने पिछले 11 साल का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। साल 2010 में नवंबर के महीने में 47.2 एमएम बरसात का रिकॉर्ड बना था, जिसके बाद गुरुवार को सबसे ज्यादा 15 एमएम बरसात हुई।

माउंट आबू में 11 साल का रिकॉर्ड टूटा है, जब नवंबर महीने में पारा 9 डिग्री सेल्सियस है। वहां आमतौर पर इस समय तक तापमान 4 डिग्री तक पहुंच जाता है। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 9.5 और अधिकतम तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तीन साल पहले 11 नवंबर 2019 की बात करें तो न्यूनतम तापमान 5.7 डिग्री और अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस था। वही 15 नवंबर 2019 को न्यूनतम तापमान सबसे कम 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था ।

जयपुर, सीकर, श्रीगंगानगर, सवाई माधोपुर, करौली, चित्तौड़गढ़ और अलवर, में 10 नवंबर को दिन का तापमान भी 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। जयपुर, सीकर जिले में बारिश के तापमान में जबरदस्त गिरावट हुई। सबसे ज्यादा तापमान पिलानी में 35.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। 10 नवंबर को हुई बारिश और आज कोहरा व ओस से रबी की फसलों को भी फायदा हुआ। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार मानसून विदा होने के बाद हवाओं की दिशा बदलती है और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस शुरू हो जाते हैं, जिस कारण राजस्थान सहित उत्तर भारत में साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनता है। इससे दिन-रात के तापमान में कमी होती है, लेकिन इस बार मानसून विदा होने के बाद 5 नवंबर तक उत्तर भारत में न तो कोई एक्टिव वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आया और नहीं कोई साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना। इस सिस्टम में हवा का प्रेशर बनता है और आसमान साफ रहता है। आसमान साफ रहने से दिन में धूप रहती है और गर्मी होती है। इसी कारण से नवंबर में तापमान इतना ज्यादा देखने को मिला।

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