टुकड़ों में मिला पुजारी का शव

धौलपुर जिले में 3 दिन से लापता पुजारी का शव मिला है। शव के 4 टुकड़े करके दो अलग-अलग बोरो में भरा गया था। जिस मंदिर में पुजारी पूजा-पाठ करता था, उसके पास पहाड़ी पर एक कटर मिला है। उसके चारों तरफ पत्थर रखे हुए हैं। पुलिस का मानना है कि शव को पहाड़ी पर काटा गया है, फिर बोरे में बांधकर नदी में फेंका होगा। बाद में शव भरे बोरे नदी किनारे आ गए। मामला जिले के कंचनपुर थाना क्षेत्र का है।

कंचनपुर थाना प्रभारी हेमराज शर्मा ने बताया कि भीमगढ़ गांव में बामनी नदी के किनारे शव मिलने की सूचना मिली थी। नदी किनारे 2 बोरे रखे मिले। इसमें शव के 4 टुकड़े मिले। ग्रामीणों ने इसकी पहचान चामड़ माता के मंदिर के पुजारी भावउद्दीन (60) पुत्र शेरखान के रूप में की, जो भीमगढ़ गांव का ही रहने वाला था।

एसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि घटनास्थल से 100 मीटर की दूरी पर चामड़ माता का मंदिर है। उसमें मृतक पूजा-पाठ करता था। इसी मंदिर के पास एक गुफा में तीन साधु रहते थे। इनके नाम केशव दास, सियाराम और महेश दास है। ये तीनों फरार बताए जा रहे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि साधुओं का पुजारी से विवाद था, जिसके चलते हत्या करने की आशंका है। संदेह के आधार पर उनकी तलाश में टीम को भेजा गया है। जांच के लिए धौलपुर से एफएसएल टीम को भी बुलाया गया है। उन्होंने बताया कि गुफा के ऊपर पहाड़ी पर एक बड़ा कटर मिला है, जिसके चारों तरफ पत्थर रखे हुए हैं। संभवत: शव को पहाड़ी पर काटने के बाद बोरे में डालकर नीचे नदी में फेंका गया है। बाद में यही बोरे नदी किनारे आ गए।

गांव वालों ने बताया कि भावउद्दीन ने शादी नहीं की थी। उसके परिवार के लोग भीमगढ़ गांव में ही रहते हैं। चामड़ माता के मंदिर में शुक्ल पक्ष सप्तमी को जात लगती थी, जिसमें चढ़ावा आता था। मंदिर के बर्तनों और चढ़ावों को लेकर लोचन दास बाबा की गुफा में रहने वाले केशव दास, सियाराम और महेश दास उससे झगड़ा करते थे।

परिवार के लोगों ने बताया के भावउद्दीन की पूजा-पाठ में आस्था थी। करीब 10 साल पहले उसने बामनी नदी के किनारे मंदिर बनाया था और वहां चामड़ माता की मूर्ति स्थापित कर पूजा-पाठ करने लगा था। वह मंदिर में ही रहता था और आसपास के गांवों से मांगकर जीवन-यापन कर रहा था। परिवार के लोग उसको चाय देने रोजाना मंदिर आते थे। भावउद्दीन के भतीजे जाकिर ने बताया कि रविवार सुबह चाय देने आया, तो वह मंदिर में नहीं मिले। मंगलवार को भी वह मंदिर में आया तो उसके चाचा नहीं मिले। इसके बाद उसने परिवार के लोगों को जानकारी दी।

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