श्रीराम, रामचरितमानस पर सवाल, विवाद

श्रीराम औऱ रामचरितमानस पर विवादित टिप्पणियां की गई हैं। समाजवादी पार्टी के नेता और विधान परिषद सदस्य स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा, श्रीरामचरितमानस में सब बकवास है। इसे बैन कर देना देना चाहिए। वहीं, कर्नाटक के मांड्या में एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर और लेखक केएस भगवान ने भगवान राम के चरित्र पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि उन्हें आदर्श नहीं माना जा सकता है।

स्वामी मौर्य ने कहा, शूद्र-जाति को पढ़ने का अधिकार अंग्रेजों के जमाने में मिला। श्रीरामचरितमानस ने जातिवाद घोलने का काम किया है। श्रीरामचरितमानस से विवादित अंश को तुरंत हटा देना चाहिए। स्वामी प्रसाद मौर्य का विवादित बयान कोई पहली बार नहीं है। इससे पहले उन्होंने कहा था मोहन भागवत में साहस है तो वह जातिवाद का जहर घोलने वाली पुस्तक ‘मनुस्मृति’ पर प्रतिबंध लगवाएं।

केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर पलटवार करते हुए कहा, सतानन धर्म को गाली देना फैशन बन गया है। मुस्लिम धर्मगुरुओं को कोई कुछ नहीं कह सकता है। दूसरे धर्म को कुछ कहने से सिर तन से जुदा हो जाता है। जब तक सनातन धर्म है, तभी तक देश में लोकतंत्र है।

उधर, कर्नाटक के सेवानिवृत्त प्रोफेसर और लेखक केएस भगवान ने कहा कि (भगवान) राम दोपहर में सीता के साथ बैठते थे और पूरे दिन पीते थे… । उन्होंने बिना परवाह किए अपनी पत्नी सीता को जंगल में भेज दिया…। एक पेड़ के नीचे तपस्या कर रहे शूद्र शंबूक का सिर काट दिया। वे कैसे आदर्श हो सकते हैं। भगवान राम आदर्श नहीं हो सकते हैं।

इस बयान के बाद भाजपा बिफर गई है उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की। पार्टी के एक नेता विवेक रेड्डी ने कहा कि ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए। लेखक का बयान उनकी मानसिकता को दर्शाता है।

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