शून्य सहनशीलता से लगे अंकुश

  • रंजना मिश्रा –
    हाल ही में सीबीआई ने 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 76 ठिकानों पर ऑनलाइन बाल यौन उत्पीडऩ और शोषण के मामले में छापेमारी की है। भारत में चाइल्ड पोर्नोग्राफी गंभीर अपराध है। आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत पहली बार चाइल्ड पोर्नोग्राफी का अपराध करने पर 5 साल की कैद और 10 लाख रुपए जुर्माने की सजा है। अपराध दोहराए जाने पर 10 लाख रुपए के जुर्माने के साथ 7 वर्ष के कारावास का प्रावधान है। इसके अलावा पोक्सो अधिनियम में भी बाल अश्लीलता के संबंध में सजा का प्रावधान है। केंद्र सरकार ने इंटरपोल और इंटरनेट वॉच फाउंडेशन की मदद से चाइल्ड पोर्नोग्राफी की 35 सौ से अधिक वेबसाइटों को ब्लॉक किया है। इसके बावजूद अश्लीलता के कारोबार का नेटवर्क पूरे देश और विदेशों में इस कदर फैला हुआ है कि इस पर रोक लगाना नामुमकिन-सा लगता है। राज्यों और केंद्र के पास इस पर निगरानी रखने और कार्रवाई करने का मजबूत तंत्र मौजूद नहीं है।
    खूब देखते हम
    वैसे तो भारत में पोर्न बनाना, बेचना, शेयर करना और इसका सार्वजनिक प्रदर्शन प्रतिबंधित है, लेकिन अफसोस कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे अधिक पोर्न देखने वाला देश है। वर्ष 2018 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार 2017 से 2018 के बीच भारत में पॉर्न देखने की दर में 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अब तो हालात और भी गंभीर हैं। स्मार्टफोन की उपलब्धता और तेज गति इंटरनेट के कारण पोर्न का दायरा कई गुना बढ़ गया है। भारत सरकार द्वारा कई वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद इस पर खास प्रभाव नहीं पड़ा है। ये वेबसाइटें नए-नए डोमेन लेकर भारतीय बाजार में आ रही हैं। अब तो वाट्सऐप, टेलीग्राम, ट्विटर जैसे कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग इसे देख रहे हैं। सबसे अधिक चिंता की बात तो ये है कि बच्चे भी पोर्न फिल्मों के शिकंजे में आ रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई के इस दौर में बच्चों के पास स्मार्टफोन हैं, जिससे वे इसकी चपेट में आसानी से आ रहे हैं।
    माता-पिता को चाहिए कि वो अपने बच्चों पर पूरी निगरानी और नियंत्रण रखें। इसके साथ ही बच्चों को अच्छे संस्कारों व शिक्षा द्वारा ये समझाने का प्रयास करना होगा कि पोर्न नशे से भी घातक है। बच्चों के मन में अच्छे-बुरे की समझ विकसित करनी होगी। वर्तमान में सोशल साइट्स का चलन तेजी से बढ़ा है। फेसबुक पर दोस्त बनाने की होड़ सी मची हुई है। इस दौरान कई बार गलत व्यक्ति भी फ्रेंडलिस्ट में शामिल हो जाते हैं, जो परेशानी का कारण बन जाते हैं। बच्चों को समझाना होगा कि वो सोशल साइट्स पर गलत लोगों को फ्रेंड न बनाएं। यदि कोई फेसबुक या वाट्सऐप पर ऐसी टिप्पणी या पोस्ट करता है, जिससे उनको असहजता महसूस होती है तो उसे तत्काल अपनी सूची से हटा दें और इसकी जानकारी माता-पिता को व हेल्पलाइन नंबर पर दें। विद्यालयों में तथा अन्य मंचों के माध्यम से बाल यौन शोषण व अपराध के प्रति बच्चों को व बड़ों को जागरूक करने के कार्यक्रम होने चाहिए। बच्चों को गुड और बैड टच की जानकारी देनी चाहिए।
    अक्सर बच्चों का यौन शोषण करने वाला अपराधी, उसके अपने ही परिवार का सदस्य या कोई नजदीकी होता है। ऐसे में यदि बच्चा अपने माता-पिता या किसी बड़े से कोई शिकायत करता है तो उसकी बात पर विश्वास करके उसकी जांच करनी चाहिए और दोषी व्यक्ति कितना भी नजदीकी क्यों न हो, उसे सजा दिलाने से पीछे नहीं हटना चाहिए। सरकार को भी ऐसी तकनीक विकसित करनी होगी, जिससे अश्लील वीडियो और कंटेंट को सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म में बैन किया जा सके। क्योंकि सोशल साइट्स पर परोसी गई ये अश्लीलता हमारे पूरे समाज को दूषित कर रही है और ये बच्चों के लिए बहुत घातक है।
    डीप वेब-डार्क वेब
    विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत सारा सीसैम कंटेंट डार्क वेब के बंद चैट रूम्स में भी शेयर होता है, जहां खरीद-फरोख्त के लिए बिटकॉइन का इस्तेमाल किया जाता है। डार्क वेब इंटरनेट का वो कोना है, जहां कई सारे गैरकानूनी धंधे चलते हैं। दरअसल जो इंटरनेट हम इस्तेमाल करते हैं, वो तो वेब की दुनिया का बहुत छोटा सा हिस्सा है, जिसे ‘सरफेस वेब’ कहते हैं। इसके नीचे छिपा हुआ इंटरनेट ‘डीप वेब’ कहलाता है। डीप वेब में वो हर पेज आता है, जिसे आम सर्च इंजन ढूंढ़ नहीं सकते। मसलन यूजर डेटाबेस, स्टेजिंग स्तर की वेबसाइट, पेमेंट गेटवे आदि। डार्क वेब इसी डीप वेब का वो कोना है, जहां हजारों वेबसाइट्स गुमनाम रहकर कई तरह के काले-बाजार चलाती हैं। बेचने वाले को पता नहीं होता कि खरीदने वाला कौन है और खरीदने वाले को नहीं पता होता कि बेचने वाला कौन है। ये कंटेंट शेयर करने वाले एक तरह की सोच रखने वाले लोग होते हैं, जो मैसेजिंग ऐप्स पर सीसैम कंटेंट शेयर करते हैं। ये काम कोई संगठित गैंग नहीं करता।
    एक सॉफ्टवेयर ‘आईकाकॉप्स’ (इंटरनेट क्राइम्स अगेंस्ट चिल्ड्रन एंड चाइल्ड ऑनलाइन प्रोटेक्टिव सर्विसेज) अधिकारियों को कथित दोषियों के आईपी ऐड्रेसेस ढूंढऩे में मदद कर रहा है। पिछले 2 सालों में, जब से इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल शुरू हुआ, तब से अभी तक करीब 1500 तलाशी अभियानों को अंजाम दिया जा चुका है और साढ़े तीन सौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। देश में ही विकसित किए गए सॉफ्टवेयर ‘ग्रैपनेल’ को भी इसी काम में लगाया गया है। यह सॉफ्टवेयर डार्क वेब में किसी सर्च की तरह है, जहां कीवर्ड्स टाइप करने पर ऐसे लिंक्स मिलते हैं, जिनमें सीसैम कंटेंट होता है। फिर पुलिस इन लोगों की पहचान करती है और उन पर कार्यवाही की जाती है।

वाट्सऐप से सुराग
बाल यौन शोषण मामले की जांच के लिए सीबीआई ने एक विशेष यूनिट बनाई है। ये ऐसी तमाम वेबसाइट पर निगाह रखती है, जो बाल यौन शोषण के मामलों का प्रचार-प्रसार करते हैं या उनके वीडियो की खरीद-फरोख्त से जुड़े हैं। इस विशेष यूनिट को पता चला कि कोरोना काल में ऐसे मामलों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। इसने जब सोशल नेटवर्क की इन वेबसाइटों और वाट्सऐप ग्रुपों को खंगालना शुरू किया तो उसे ओनली चाइल्ड सेक्स वीडियो, नॉटी वीडियो, फन वीडियो, सुपर बॉयज वीडियो जैसे अनेक व्हाट्सएप ग्रुप मिले, जिनके जरिए बाल यौन शोषण का प्रचार प्रसार हो रहा था। साथ ही अनेक लोग इसकी खरीद-फरोख्त में भी शामिल पाए गए। जांच के दौरान 80 से ज्यादा लोग इसमें शामिल पाए गए। इन मामलों के तार 100 से ज्यादा देशों से जुड़े हुए हैं। इसमें मुस्लिम देशों के लोगों की अहम भूमिका पाई गई है। इन देशों में पाकिस्तान, सऊदी अरब, बांग्लादेश, श्रीलंका, घाना, इजिप्ट, यमन, इंडोनेशिया, अजरबैजान, इंग्लैंड और अमरीका भी शामिल हैं।
भारत में 50 ग्रुप ऐसे हैं जो बाल यौन शोषण के वीडियो और चित्रों आदि का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और कुछ लोगों द्वारा इसे बेचा भी जा रहा है। इन ग्रुपों में 5 हजार से ज्यादा लोग जुड़े पाए गए। दो वेबसाइट ऐसी पाई गई हैं, जो बाल यौन शोषण के वीडियो के लिए स्टोरेज सुविधा मुहैया कराती हैं, जबकि एक रूसी वेबसाइट के जरिए फोटो शेयरिंग की सुविधा दी जाती है। ऐसी तमाम वेबसाइटों पर जांच एजेंसी की कड़ी निगाहें लगी हुई हैं और अनेक लोग जो इस धंधे को बढ़ावा दे रहे हैं, अभी भी सीबीआई के रडार पर हैं। सीबीआई की छापेमारी में मिले इन इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस एवं दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
सीबीआई इस मामले के तहत इंस्टाग्राम पोर्न वेबसाइट समेत अनेक सोशल नेटवर्क की वेबसाइटों और डार्क वेब की जांच कर रही है। सीबीआई के छापे में बरामद कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों में इंटरनेशनल कनेक्शन के कोड भी पाए गए हैं, जिन्हें डिकोड करने की कोशिश की जा रही है। इन कोड में वीडियो बनाने वाली पार्टी, अपलोड करने वाली पार्टी और बेचने वाली पार्टी के बारे में भी अहम जानकारी है। इन जानकारियों को डिकोड करने पर कुछ और गिरफ्तारियां तथा बड़े खुलासे हो सकते हैं।

शून्य सहनशीलता जरूरी
देश और विदेशों में फैले इस जाल को जड़ से समाप्त कर पाना तो बहुत मुश्किल है, लेकिन कड़ी कानूनी कार्यवाही और समाज में जागरूकता फैलाकर अश्लीलता के इस कारोबार पर बहुत हद तक लगाम लगाई जा सकती है। मौजूदा कानूनों को उचित तरीके से क्रियान्वित किया जाना चाहिए और पोर्न मामलों में कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए। बाल संरक्षण योजना और अन्य सहायता सेवाओं को सुदृढ़ कर बालकों के विरुद्ध दर्ज अपराधों के लिए त्वरित न्याय की विशेष आवश्यकता है। साथ ही पीडि़त और उसके परिवार के सदस्यों के लिए मनोवैज्ञानिक, सामाजिक परामर्श की भी व्यवस्था हो। बाल संरक्षण केवल कानूनों और विभिन्न दिशा-निर्देशों के साथ सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। हमें बच्चों के विरुद्ध हिंसा और यौन उत्पीडऩ के प्रति शून्य सहनशीलता की अवधारणा विकसित करनी होगी। बच्चे देश का भविष्य हैं, उनकी सुरक्षा करना परिवार की, समाज कीऔर देश की सबसे अहम जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए देश की सभी संस्थाओं और समाज के जिम्मेदार व्यक्तियों को एकजुट होना होगा। ठ्ठ

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.