हार के भय से योगी ने छोड़ी अयोध्या

यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अपने गृहनगर गोरखपुर से चुनाव लड़ने का फैसला चौकाने वाला है। अब तक यह तय माना जा रहा था कि वे अयोध्या से चुनावी रण में उतरेंगे। सूत्रों की मानें तो पार्टी हाईकमान की भी मंशा यही थी। योगी जैसा कट्‌टर हिंदुत्व का चेहरा अयोध्या से उतरता तो पूरे प्रदेश में वोटों के ध्रुवीकरण की उम्मीद ज्यादा थी।

मगर खुद योगी अपने गढ़ गोरखपुर से उतरकर पहले अपनी जीत सुनिश्चित करना चाहते थे। अयोध्या ऐसी सीट है, जहां 93.23 फीसदीआबादी हिंदू होने के बावजूद भाजपा की जीत तय नहीं रही है। 2012 में यह सीट सपा ने जीती थी, 2017 में मोदी-योगी लहर में भाजपा के हाथ आई। इस बार समीकरण क्या बनेंगे, अभी यह तय नहीं है।

अयोध्या में ब्राह्मण खुश रहते तो भाजपा की जीत पक्की थी। वहां शहरी क्षेत्र में 70 हजार ब्राह्मण, 28 हजार क्षत्रिय हैं।27 हजार मुस्लिम के साथ ही 50 हजार दलित भी हैं। इसके अलावा यादव वोटरों की संख्या 40 हजार है।योगी उतरते तो टक्कर कड़ी रहती और उन्हें यहां अपना ज्यादा समय देना पड़ता, क्योंकि सपा के मौजूदा विधायक पवन पांडेय का दबदबा यहां अधिक है। योगी के यहां से हटने के बाद अयोध्या सदर सीट भाजपा के हाथ से निकलती दिख रही है।

हालांकि अयोध्या सदर सीट से योगी के चुनाव लड़ने के कयासों के बीच भाजपा कार्यकर्ता के साथ ही संत, साधु और मंदिर से जुड़े लोगों ने जनसंपर्क शुरू कर दिया था। 8 से 12 लोगों की टीम बना करके घर-घर संपर्क किया जा रहा था। साधु-संत मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं से जहां योगी के पक्ष में वोट डालने की बात कह रहे थे, वहींव्यापारी भी लगातार योगी के पक्ष में प्रचार कर रहे थे। वार्ड स्तर पर भाजपा का स्थायी कार्यालय बनाया गया था। जहां से प्रत्येक वार्ड में रहने वाले लोगों को योगी के पक्ष में सहेजा जा सके। मगर अब योगी के गोरखपुर से उतरने के पक्ष में तर्क दिया जा रहा है कि यदि वे गोरखपुर क्षेत्र से बाहर रहते तो, शहरी के साथ ही आसपास के 17 विधानसभा सीटों पर असर पड़ने के आसार थे। गोरखपुर ग्रामीण के साथ ही पिपराइच, चौरीचौरा की सीट भी फंसती हुई दिखाई दे रही थी। कुशीनगर में स्वामी प्रसाद मौर्या के अलग होने से पडरौना, तमकुहीराज, फाजिलनगर की सीट पर भी सपा का कब्जा होता दिख रहा था। क्योंकि, यहां पर कांग्रेस के साथ ही मौर्या का दबदबा है। संत कबीर नगर में तीन विधानसभा सीट में खलीलाबाद की सीट हाथ से निकलती दिखाई दे रही थी। इन सीटों को हाथ से नहीं निकलने देने के इरादे से ही योगी यहां से ताल ठोकेंगे।

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