काबुल में लड़कियां सड़क पर

अफगानिस्तान में लड़कियों के लिए सेकेंडरी स्कूल को फिर से बंद करने के फैसले का विरोध हो रहा है। राजधानी काबुल में करीब दो दर्जन लड़कियां और महिलाएं स्कूल खोलने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने लगीं हैं। पिछले सप्ताह तालिबान देश में लड़कियों के लिए हाई स्कूल खोलने के वादे से मुकर गया। अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद तालिबान ने पूरे देश में स्कूल बंद कर दिए थे।

बुधवार को अफगानिस्तान की हजारों लड़कियां फिर से पढ़ाई की उम्मीद को लेकर स्कूल पहुंची थीं। इस तारीख से शिक्षा मंत्रालय ने क्लास को दोबारा शुरू करने का फैसला किया था, लेकिन उसी दिन कुछ घंटे बाद यह घोषणा करके चौंका दिया कि लड़कियों के लिए यूनिफॉर्म अभी तय नहीं हुई है इसलिए स्कूल नहीं खोले जा रहे हैं। तालिबान सरकार के इस फैसले से कई लड़कियां रो पड़ीं।

शनिवार को तालिबान के इस फैसले के खिलाफ काबुल में सिटी स्क्वॉयर पर पहुंची लड़कियों ने प्रदर्शन किया और “स्कूल खोलो, न्याय दो” के नारे लगाए। ये लड़किया अपने हाथों में तख्तियां लेकर आई थीं, जिस पर लिखा था कि- शिक्षा हमारा मौलिक अधिकार है, यह राजनीतिक योजना नहीं है। इन प्रदर्शनकारी लड़कियों ने कम दूरी का जुलूस निकाला, लेकिन तालिबानी लड़ाकों के प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने के बाद वापस लौट गईं। हालांकि कंधार स्थित तालिबानी सत्ता और इस्लामिक मजहब का केंद्र यह स्पष्ट करने में असमर्थ रहा कि उन्होंने लड़कियों के लिए स्कूल खोलने का फैसला क्यों वापस लिया। अफगानिस्तान में सेकेंडरी स्कूल की लड़कियां पिछले 7 महीनों से स्कूल नहीं गई हैं।

प्रदर्शन में शामिल एक लड़की ने कहा कि, पैंगबर मोहम्मद का कहना है कि, शिक्षा सबका अधिकार है लेकिन तालिबान ने हम से यह अधिकार छीन लिया। वहीं एक अन्य प्रदर्शनकारी लड़की बोली कि तालिबान अफगानिस्तान की महिलाओं पर जुल्म कर रहा है। पिछले साल 15 अगस्त को अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद तालिबान ने 2 दशक बाद सत्ता में वापसी की है। इसके बाद से ही तालिबानी सरकार ने महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं। महिलाओं को सरकारी नौकरियों से निकाल दिया गया, उनके अकेले यात्रा करने पर प्रतिबंध लगाया और कुरान के मुताबिक कपड़े पहनने का आदेश दिया।

हालांकि इसबार सत्ता में लौटने के बाद तालिबान ने अपने शासन प्रणाली में नरम रूख रखनं का वादा किया था। इससे पहले 1996 से 2001 के बीच अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता के दौरान लोगों पर कई तरह के जुल्म किए गए थे। हालांकि अब भी पहले की तरह कई प्रतिबंध लागू हैं। इन्हें भले ही तालिबान ने राष्ट्रीय स्तर पर लागू नहीं किया हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर ऐसे कई तुगलकी फरमान आज भी कायम हैं।

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