डाक्टरों पर सीधे केस नहीं, पहले जांच

राजस्थान सरकार के गृह विभाग ने डॉक्टर्स और मेडिकल वर्कर्स के लिए एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी किया है। नई गाइडलाइन में कहा गया कि इलाज के दौरान मौत होने पर अब बिना जांच किए सीधे डॉक्टर और मेडिकल वर्कर्स पर मुकदमा दर्ज नहीं होगा। इलाज में लापरवाही से मौत पर मेडिकल बोर्ड बनेगा। बोर्ड के लापरवाही पाए जाने पर ही मामला दर्ज होगा।

एसओपी में साफ कहा गया है कि किसी भी डॉक्टर या मेडिकल वर्कर को बिना जिला पुलिस अधीक्षक या कमिश्नर के आदेश के गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। ऐसे आदेश तब ही दिए जाएंगे, जब थाना प्रभारी की लिखित राय में ऐसे डॉक्टर या मेडिकल वर्कर जांच में मदद नहीं कर रहा हो। सबूत इकट्ठा करने के लिए उसकी जरूरत हो या केस में बचने के लिए वह अपने आप को छिपा रहा हो। मेडिकल लापरवाही की राय बोर्ड से मिलने पर ही थाना प्रबारी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करेगा। जांच के बाद कोर्ट में आरोप-पत्र पेश करने से पहले जो केस धारा 197 सीपीसी की कैटेगरी में आते हैं, उन सभी मामलों में सक्षम लेवल पर अभियोजन स्वीकृति ली जाएगी।

इसके साथ ही राजस्थान में मेडिकल वर्कर्स से हिंसा और सम्पत्ति को नुकसान के खिलाफ 2008 के एक्ट की कड़ाई से पालना करने, डॉक्टर या मेडिकल वर्कर की सूचना पर जल्द कार्यवाही करने, जरूरत होने पर उनकी सम्पत्ति की सुरक्षा के लिए कानूनी कार्रवाई जल्द करने को भी कहा गया है। डॉक्टर मरीज के इलाज का विस्तृत नोट तैयार करेंगे। सरकार ने डॉक्टर्स और मेडिकल वर्कर्स से उम्मीद जताई है कि वो कोई अप्रिय घटना होने पर अपनी किसी मांग को मनवाने के लिए कार्य बहिष्कार नहीं करेंगे। सरकार के सामने वैध रूप से अपनी बात रखेंगे।

एसओपी में कहा गया है कि कई बार इंटरनेट के जरिए आधी-अधूरी सूचना लेकर मरीज के परिजन डॉक्टर या मेडिकल वर्कर्स के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करवा देते हैं। ऐसे हालात में उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ित होना पड़ता है। इससे उनकी कार्य क्षमता पर विपरीत असर पड़ता है। हाईकोर्ट ने कई फैसलों में कानूनी सिद्धांत दिए हैं, जिन्हें देखते हुए यह एसओपी तय की जाती है। मेडिकल लापरवाही के केस की सूचना या परिवाद पुलिस थाने के प्रभारी को मिलने पर वह उसे रोजनामचे में लिखेगा। अगर सूचना या परिवाद मेडिकल लापरवाही के कारण हुई मौत से संबंधित है तो ‘कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर 1973’ के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। ऐसे हालात में पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी भी जरूर करवाई जाएगी।

एसएचओ को यह आदेश है कि वह मेडिकल लापरवाही की शिकायत पर प्राथमिक जांच करे। जांच के दौरान केस के संबंध में स्वतंत्र और निष्पक्ष राय डॉक्टर या मेडिकल बोर्ड से लेगा। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल या सीएमएचओ की यह ड्यूटी होगी कि वह अधिकतम 3 दिन में डॉक्टर को नामित करेंगे या मेडिकल बोर्ड गठित करेंगे। मेडिकल लापरवाही से मौत या बड़ा नुकसान होने पर मेडिकल बोर्ड अनिवार्य रूप से बनाया जाएगा, जिसमें स्पेशलिस्ट को जरूर शामिल किया जाएगा। मेडिकल बोर्ड बिना भेदभाव के 15 दिन में अपनी राय या रिपोर्ट देंगे। इस टाइम पीरियड में राय नहीं दे पाने की स्थिति में 15 दिन की और बढ़ोतरी की जा सकेगी। इसकी सूचना संबंधित पुलिस एसपी को भेजकर राज्य सरकार को भी यह फैक्ट ध्यान में लाना होगा।

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