मीडिया मुगल व उबर के ‘मधुर रिश्तों’ का खुलासा

भारत में गोदी मीडिया की चर्चा के बीच, मीडिया मुगलों के देशी-विदेशी कार्पोरेट घरानों संग ‘मधुर रिश्तों’ बड़ा खुलासा हुआ है। अंग्रेजी अखबार “इंडियन एक्सप्रेस” में दो दिनों से अंतर्राष्ट्रीय डिजिटल टैक्सी सेवा कंपनी- उबर की करतूतें उजागर की जा रही है। इसी कड़ी में जाने-माने टाइम्स मीडिया ग्रुप के इस कंपनी के साथ व्यावसायिक रिश्तों की परतें भी खोली गई हैं।

अखबार के अनुसार टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप की उबर के साथ नजदीकियां 2014 में उस समय बढीं, जब दिल्ली में उबर टेक्सी के एक चालक द्वारा महिला यात्री से रेप का मामला सामने आया था। इस कांड ने उबर के अमरीका स्थित मुख्यालय पर खलबली मचा दी थी। भारत में कंपनी की टैक्सी सेवा रोक दी गई थी। लिहाजा कंपनी किसी भी तरह मामले को रफादफा करने में जुट गई। उसी समय इकनॉमिक टाइम्स के सम्पादक ने रेप की घटना के तीन हफ्ते बाद 31 दिसम्बर 2014 को उबर के को-फाउंडर ट्रेविस कैलनिक को ई-मेल भेजकर सूचित किया कि दिल्ली सरकार उबर पर लगे बैन को हटाने औऱ उसे टैक्सी सेवा फिर शुरू करने की अनुमति देने के लिए नियमों में बदलाव करने जा रही है। लिहाजा अब वो (ट्रेविस) जवनरी में भारत आने का कार्यक्रम बनाएं। वह अपनी दिल्ली यात्रा 16-17 जनवरी को करें तो बेहतर होगा। क्योंकि उस समय इकनॉमिक टाइम्स एक ग्लोबल बिजनेस समिट आयोजित कर रहा है, जिसमें वह भी भाग लें और अपने विचार रखें। ताकि भारत व अन्य देशों में नीति निर्धारण एजेंडा तय करने में मदद मिले। उस मौके पर उन्हें भारत के नीति-निर्माताओं से मुलाकात का सुअवसर भी मिल सकता है।

एक्सप्रेस की खबर के अनुसार ट्रेविस ने यह ई-मेल मिलते ही अपने एसोसिएट्स को लिखा, अगर कुछ मतलब निकलता है तो हमें टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई) के साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखने चाहिए। इकनॉमित टाइम्स के सम्पादक की ई-मेल के तीन महीने बाद ही 23 मार्च 2015 को टीओआई की डिजिटल कंपनी—टाइम्स इंटरनेट द्वारा उबर कंपनी में करीब 150 करोड़ के ‘रणनीतिक निवेश’ की घोषणा की गई। उसी दिन उबर की ओर से भी भारत में कंपनी के व्यावसायिक विस्तार में मदद के लिए टांइम्स इंटरनेट के साथ पार्टनरशिप का ऐलान किया गया।

उसके बाद से ऐसा संयोग बना कि 8 जुलाई 2015 को दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उबर को दिल्ली में फिर से टैक्सी सेवा शुरू करने से मना कर दिया गया था। हाईकोर्ट के फैसले से उबर पर लगा बैन भी हट गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उबर ने अपने व्यावसायिक हितों को साधने के लिए केवल भारत में ही मीडिया कंपनी को साथ गठजोड़ नहीं किया, बल्कि कई अन्य देशों में भी उसने ऐसा ही किया है। इधर, टाइम्स इंटरनेट के सौदे को लेकर इँडियन एक्सप्रेस तथा द गार्जियन द्वारा भेजी गई प्रश्नावली के जवाब में टीओआई ग्रुप कार्यकारिणी के चैयरमैन शिवकुमार सुंदरम ने एक ई-मेल भेजकर सारे ‘कलर्ड’ प्रश्नों को खारिज कर दिया। उन्होंने लिखा कि टाइम्स ग्रुप की छवि खराब करने के प्रयासों का वह विरोध करते हैं। टाइम्स एक स्वतंत्र मीडिया हाउस है, जिसका किसी राजनीतिक दल से कोई लेनादेना नहीं है। ग्रुप का कोई एजेंडा भी नहीं है। उन्होंने कहा कि टाइम्स इंडरनेट एक स्वतंत्र कंपनी है, जो अपना कारोबार भारत के स्थापित नियमों के अनुरूप तथा टाइम्स ग्रुप की कंपनियों के लिए निर्धारित आचार संहिता के अंतर्गत ही करती है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि भारत में टाइम्स ग्रुप के उबर कंपनी के साथ वर्षों से बड़े ही मधुर विज्ञापन संबंध हैं।  

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