वागड़ में ‘दीवासा’ से होती लोकपर्वों की शुरूआत

डॉ. दीपक आचार्य–

वैसे तो प्रकृति प्रेम से परिपूर्ण और आनन्दाभिव्यक्ति का वार्षिक पर्व–हरियाली अमावस हर किसी के तन-मन को हरा और भाव भरा कर देने के लिए आदिकाल से प्रसिद्ध रहा है। मगर राजस्थान के वाग्वर (वागड़) अंचल की उत्सवी परम्परा में हरियाली अमावास्या को ’दीवासा’ कहा जाता है। इस अंचल में दीवासा को वर्षाकालीन लोक पर्वों का उद्घाटक माना जाता है। इस दिन पिण्ड से लेकर परिवेश तक में बदलाव आरंभ होने लगता है।

कभी 75 इंच से ज्यादा बारिश वाले बांसवाड़ा को राजस्थान का चेरापूंजी कहा जाता था। हांलांकि अब सघन जंगलों और नैसर्गिक सौन्दर्य, नदी-नालों का महीनों कल-कल प्रवाह और वन्य जीवों की अठखेलियों भरा माहौल भले न दिखे, लेकिन हरियाली अमावस तक वागड़ की धरती का सौन्दर्य रमणीय हो जाता है।

उल्लास का महापर्व–दीवासा का दिन वागड़वासियों के लिए प्रकृति गान का वह लोकोत्सव है, जब तन-मन से लेकर परिवेश और हवाएँ तक मदमस्त हो जयगान करती हैं। समूचे अंचल में आनंद का ज्वार उमड़ने लगता है।

लप्सी का आनंद–इस दिन घर-घर में पकवान बनाए जाते हैं। ख़ासकर लप्सी की परम्परा रही है। गुड़ और गेहूं से बनी लप्सी वागड़ में शुभारंभ का प्रतीक है। इसलिए शुभ कार्यों का श्रीगणेश लप्सी से होता है। यह व्यंजन पूरे वर्ष उत्सवी जीवन के निर्विघ्न होने का संकेत भी देता है।

बरसात और ठण्ढी हवाओं के इस मौसम में गरम-गरम लप्सी औषधीय लाभ भी करती है। बुजुर्ग बताते हैं कि रियासतकाल में दीवासा पर बांसवाड़ा में राज दरबार लगता व दरीखाना भरता था।

जंगल में मंगल–हरियाली अमावास्या के दिन मनोरम नैसर्गिक सौन्दर्य को निहारने लोग दर्शनीय स्थलों की ओऱ निकल जाते हैं। वहां पूरे परिवार एवं इष्ट मित्रों के साथ पिकनिक का मजा लेते हैं। हर कहीं पिकनिक का माहौल नजर आता है।

कल्पवृक्ष दर्शन–बांसवाड़ा में इस पावन दिवस पर कल्पवृक्ष के दर्शन व परिक्रमा के लिए श्रृद्वालुओं का तांता लगता है। कल्पवृक्ष बांसवाड़ा-रतलाम मार्ग पर शहर से बाहर बाईतालाब के पास पर्याप्त संख्या में हैं, जहां राजा-रानी नामक दो प्राचीन कल्पवृक्ष मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाले वृक्षों के रूप में पूजे जाते हैं। श्रद्धालु इन वृक्षों की विषम संख्या में परिक्रमा करते हैं। उधर, डूंगरपुर जिला मुख्यालय पर गेपसागर की पाल पर नानाभाई पार्क व फतहगढ़ी पर मेला लगता है। हरियाली अमावास्या को महिलाएं हरे वस्त्र पहनकर प्राकृतिक आनन्द की अनुभूति करती हैं।

हरियाली आह्वान–इस बार हरियाली अमावास्या या दीवासा आज गुरुवार को होने से इसका महत्त्व अधिक है। वागड़ का दीवासा प्रकृति के रंगों और रसों से जीवन को भर देने वाला वार्षिक त्योहार है, जो सभी भेदों से ऊपर उठकर हर किसी को ताजगी और सुकून का अहसास कराता है। आज ही से बांसवाड़ा नगर परिषद द्वारा कागदी क्षेत्र में मेला आयोजन की शुरूआत की जा रही है।

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