डेबिट-क्रेडिट कार्ड्स शुल्कों पर मांगी जनता से राय

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने पेमेंट सिस्टम्स में लगने वाले कई शुल्कों पर जनता की प्रतिक्रिया मांगी है। इसके लिए एक चर्चा अथवा डिस्कशन पेपर जारी किया गया है। आरबीआई ने जनता से राय मांगी है कि विभिन्न पेमेंट सिस्टम्स में लगने वाले शुल्कों में किस तरीके से पारदर्शिता लाई जा सकती है।

आरबीआई ने भुगतान प्रणालियों में डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, एनईएफटी, आरटीजीएस, यूपीआई और पीपीआई को शामिल किया है। इन्हीं सब पर लगने वाले शुल्कों पर जनता की राय मांगी है। “भुगतान प्रणालियों में शुल्क” पर एक डिस्कशन पेपर सार्वजनिक डोमेन में रखा गया है। इसमें ऐसे शुल्कों पर विभिन्न पहलुओं पर लगभग 40 प्रश्न दिए गए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस मामले पर अपनी कोई राय नहीं दी है। बैंक ने 3 अक्टूबर, 2022 तक टिप्पणियां और प्रतिक्रिया आमंत्रित की है, जिसका उपयोग नीतियों और हस्तक्षेप रणनीतियों को निर्देशित करने के लिए किया जाएगा।

आरबीआई ने यह प्रतिक्रिया मांगी है कि क्या डिजिटल भुगतान शुल्क नियामक द्वारा निर्धारित हों या बाजार उन्हें निर्धारित करे? क्या चार्जेज लेनदेन मूल्य पर लगने चाहिए या एक तय अमाउंट का अनुपात होना चाहिए? इन्हें और अधिक पारदर्शी कैसे बनाया जा सकता है?

जनता की राय को आरबीआई किस तरह से आगे बढ़ेगा, इस बारे में विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है। किंतु रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का पेमेंट विजन 2025 डॉक्यूमेंट ग्राहकों को अधिक शक्ति देने की बात पर जोर देता है। सरकार भी जनता द्वारा अधिक से अधिक डिजिटल पेमेंट्स अपनाने की इच्छुक है। इसलिए यह संभावना नहीं दिखती कि ग्राहकों के लिए शुल्क में कोई बड़ी वृद्धि हो। यदि वे ऐसा करते हैं तो वे बैंकों, फिनटेक आदि द्वारा वहन किए जा सकते हैं।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने ग्राहकों और अन्य हितधारकों से 3 अक्टूबर तक राय देने के लिए कहा है। मिले सुझावों के आधार पर अंतिम नियम बनाए जा सकते हैं। रिजर्व बैंक ने डिस्कशन पेपर में साफ किया है कि उसका इरादा किसी चीज की कोई सीमा तय करने या कंट्रोल लगाने का नहीं है, बल्कि जो सुझाव आएंगे उन पर विचार कर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

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