धनखड़ का पैतृक गांव में भावभीना स्वागत

उपराष्ट्रपति बनने के बाद जगदीप धनखड़ पहली बार आज झुंझुनूं में अपने गांव किठाना पहुंचे। उन्होंने कहा, किसान परिवार का कोई व्यक्ति इस पद तक पहुंचा है, इसे देखकर संविधान निर्माताओं को बहुत बड़ा सुख मिलेगा। मैं इसी मिट्‌टी का लाल हूं और हर दिन गांव को याद करता हूं।

गुरुवार सुबह करीब 8.30 बजे जैसे ही सेना के हेलिकॉप्टर्स की गड़गड़ाहट गांव वालों को सुनाई दी, वे उनका स्वागत करने हेलीपैड पर पहुंच गए। स्वागत के बाद धनखड़ सबसे पहले अपने आराध्य बालाजी के मंदिर पहुंचे। मंदिर तक के रास्ते में हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने उनका स्वागत किया। मंदिर में पूजा-अर्चना करने और भगवान का अशीर्वाद लेने के बाद वे अपने घर गए। यहां उन्होंने अपने दोस्तों और परिवारजनों से मुलाकात की।

उपराष्ट्रपति ने गांव के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय के स्कूल की नई बिल्डिंग का भी शिलान्यास भी किया। धनखड़ ने अपनी पांचवी क्लास तक की पढ़ाई इसी स्कूल से की है। स्कूल में पढ़ रहे बच्चों ने उनका अभिनंदन किया।

कांच नीचे नहीं करना मजबूरी

स्कूल बिल्डिंग के शिलान्यास के मौके पर धनखड़ ने कहा, उपराष्ट्रपति या राज्यपाल बनने के बाद हमारी गाड़ियों के कांच नीचे नहीं होते हैं, लेकिन यह हमारी मजबूरी है। सुरक्षा के चलते हमें ऐसी गाड़ियों में चलना होता है, लेकिन यह मत समझना हम आपसे दूर हैं। उन्होंने कहा कि गांव में हर व्यक्ति और परिवार को सरकारी योजनाओं का फायदा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि किठाना के हर व्यक्ति को मैंने एक ही नजर से देखा है, फिर चाहे वह कैसी ही राजनीति करता हो। धनखड़ ने कहा, इस गांव को आदर्श गांव बनाना मेरी परिकल्पना है। गांव के बच्चे-बच्चियों को पहले थोड़ा संकोच होता है, लेकिन वो मेहनत कर दुनिया अपनी मुठ्‌ठी में कर लेते हैं।

धनखड़ ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि लड़के-लड़की में फर्क मत करो और उन्हें जो करना है करने दो। उपराष्ट्रपति ने केंद्र की उज्जवला योजना की तारीफ की और पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया। धनखड़ दोपहर 1.15 बजे किठाना से रवाना होकर सीधे खाटू श्यामजी मंदिर पहुंचे। वहां खाटूश्यामजी के दर्शन किए। इसके बाद दोपहर 2.50 बजे वापस जयपुर एयरपोर्ट के लिए हेलिकॉप्टर से उड़ान भरी। उपराष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए 500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के साथ बड़ी संख्या पुलिस अधिकारी भी तैनात रहे।

किठाना के लोगों ने कहा कि धनखड़ का आना उनके लिए किसी त्योहार से कम नहीं है। बचपन में जो लोग उनके साथ खेले, वे उन्हें उपराष्ट्रपति बनने के बाद देखने के लिए उत्सुक थे। सभी ने ढोल मजीरों और डीजे सहित अपने-अपने तरीकों से धनखड़ का स्वागत किया। गांववालों का कहना है कि उनके इंतजार में रात को अच्छे से सो भी नहीं पाए।

गांव के बीचों-बीच धनखड़ की पुश्तैनी हवेली है। यहीं उनका, दोनों भाई कुलदीप, रणदीप और बहन इंद्रा का जन्म हुआ था। साल 1989 में जब धनखड़ ने झुंझुनूं से पहला चुनाव लड़ा तब इसी हवेली में रहकर वो पूरी चुनावी रणनीति बनाते थे। जगदीप धनखड़ के ताऊ हरीबक्ष चौधरी कई साल तक सरपंच रहे थे। उनकी कई गांवों में बढ़िया पैठ थी। धनखड़ के पिता गोकुलराम चौधरी भी रेलवे में बड़े ठेकेदार थे। धनखड़ का बचपन यहीं गुजरा। माता-पिता केसरदेवी और गोकुलराम चौधरी ने ज्यादातर समय इसी हवेली में बिताया था। अब कई सालों से यहां कोई नहीं रहता है। हवेली अब खंडहर हो चुकी है। बाहर चारों तरफ घास-फूस और झाड़ का जाल दिखाई देता है।

ग्रामीणों ने बताया कि धनखड़ गांव में अंग्रेजी बोलने वाले पहले शख्य थे। अब उनकी ख्वाहिश है, गांव का हर लड़का धड़ल्ले से अंग्रेजी बोले। इसी सोच के साथ कुछ साल पहले उन्होंने यहां एक कमरे में स्पोकन इंग्लिश​​​​​​ क्लासेज और दूसरे कमरे में कम्प्यूटर ट्रेनिंग सेंटर भी शुरू करवाया। यहां एक लाइब्रेरी भी बनवाई, जहां हर तरह की किताबों उपलब्ध है। यहां महिलाओं के लिए एक सिलाई ट्रेनिंग सेंटर भी है।

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