हंगामे के बाद विधानसभा कार्यवाही स्थगित

राजस्थान विधानसभा की आज सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे के कारण दो बार सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। हंगामे के बीच ही सदन में स्पीकर सीपी जोशी ने राज्यपाल के लौटाए गए दो बिलों का ब्यौरा रखा। इसके बाद चार बिल सदन में रखे गए। फिर शोकाभिव्यक्ति के बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी।

पुष्कर से भाजपा विधायक सुरेश सिंह रावत लंपी बीमारी और गायों की मौतों को लेकर विरोध जताने एक गाय लेकर विधानसभा पहुंचे थे। विधानसभा के बाहर से ही गाय रस्सी छुड़ा कर भाग गई। गाय सड़क पर इस कदर भागी कि गाड़ियों से गुजर रहे लोगों में भी घबराहट फैल गई। विधानसभा के बाहर सुरक्षाकर्मियों में भी अफरा-तफरी का माहौल हो गया। विधायक रावत ने कहा कि सरकार और पुलिस से नाराज होकर गाय भागी है। गाय की नाराजगी मुझसे नहीं है क्योंकि मैंने तो 10 लाख रुपए दिए हैं। विधानसभा में लंपी और गायों की मौत का मुद्दा उठाया जाएगा।

सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो भाजपा विधायकों ने वेल में आकर सवालों का कोटा खत्म करने सहित कई मुद्दों पर हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी थी। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि विधानसभा के बजट सत्र का सत्रावसान नहीं करके सीधे बैठक बुलाई गई। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि ये किस मुंह से बोल रहे हैं। भाजपा राज में इन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। इसके बाद हंगामा बढ़ गया। यह देख स्पीकर ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

आरएलपी के तीन विधायकों ने विधानसभा के वेल में आकर लंपी से गायों को बचाने के स्लोगन लिखी तख्तियां लहराईं। तीनों भाजपा विधायकों के साथ वेल में थे। आरएलपी विधायक दल के नेता पुखराज गर्ग, विधायक नारायण बेनीवाल और इंद्रा बावरी ने सदन में तख्तियां लहराकर विरोध जताया। इसीबीच, पूर्व सांसद थानसिंह जाटव, पूर्व विधायक आदराम मेघवाल, इंदिरा मायाराम,पराक्रम सिंह, भरतलाल और जयकृष्ण तोसावड़ा को श्रद्धांजलि दी गई। शोकाभिव्यक्ति के वक्त भजपा विधायकों ने हंगामा नहीं किया।

सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही भाजपा विधायकों ने स्पीकर सीपी जोशी के चैंबर में धरना दिया। उन्होंने सवाल पूछने का कोटा खत्म करने के विरोध में स्पीकर के चैंबर में बैठकर विरोध जताया।

भजापा विधायकों का तर्क था कि बजट सत्र को बीच में खत्म नहीं किया, लगातार जारी रखा। इस वजह से एक सत्र में सवाल पूछने का कोटा खत्म हो गया। अब नए सवाल नहीं पूछ सकते। अगर सत्रावसान करके विधानसभा की बैठकें बुलाई जाती तो विधायकों को सवाल पूछने का नया कोटा मिलता। स्पीकर के चैंबर में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ सहित वरिष्ठ विधायक धरने पर बैठे।

हंगामे के बीच सदन में चार बिल रखे गए। इनमें विधायकों और पूर्व विधायकों के भत्ते बढ़ाने का बिल और सहकारी संस्थाओं के प्रावधान बदलने का बिल शामिल है। चारों बिलों को बहस के बाद इसी सप्ताह पारित करवाया जाएगा। आज प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हुए। कल से सदन में प्रश्नकाल और शून्यकाल की कार्यवाही चलने के साथ बिलों पर बहस होगी। विधानसभा में लंपी पर कल बहस करवाने फैसला हुआ है। बीएसी की बैठक में कल लंपी पर बहस और सरकार की तरफ से जवाब देने का वक्त तय किया है।

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