अध्यक्ष पद की दौड़ से होंगे बाहर !

राजस्थान के ताजा सियासी घटनाक्रम के बाद कांग्रेस हाईकमान बड़ा फैसला ले सकता है। खबर है कि अशोक गहलोत पार्टी अध्यक्ष पद के चुनाव की रेस से बाहर हो सकते हैं। सोमवार को दिल्ली में 10 जनपथ पर बैठक होने के बीच ये बड़ी जानकारी सामने आई है। केरल से लेकर जयपुर तक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एक सुर में देखे जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री गहलोत ने कल राजस्थान में पायलट को सीएम पद से दूर रखने के लिए अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। अब यही कदम उनको भारी पड़ सकता है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्लूसी) ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अशोक गहलोत को अध्यक्ष पद की रेस से बाहर करने की मांग करते हुए किसी और को उम्मीदवार बनाने की बात कही है।

कांग्रेस के सीनियर नेताओं का कहना है कि वह (गहलोत) कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ से बाहर हैं। अब मुकुल वासनिक, मल्लिकार्जुन खड़गे, दिग्विजय सिंह, केसी वेणुगोपाल अध्यक्ष पद की रेस में चल रहे हैं। सीडब्ल्यूसी सदस्य और पार्टी के एक नेता ने कहा कि गहलोत ने जिस तरह का व्यवहार किया वह पार्टी नेतृत्व के साथ अच्छा नहीं रहा। सीनियर लीडरशिप की परेशानी बढ़ाई है.  

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब उन्हें पार्टी अध्यक्ष के रूप में नहीं देखना चाहते। कांग्रेस के पर्यवेक्षकों मल्लिकार्जुन खड़गे और राजस्थान के प्रभारी अजय माकन ने भी अनुशंसा की है कि अशोक गहलोत को पार्टी अध्यक्ष न बनाया जाए।

वैसे भी, समर्थक विधायकों के बागी तेवरों के बाद गहलोत के अध्यक्ष पद पर नामांकन को लेकर संशय है। एक संभावना यह बन रही है कि गहलोत के सामने किसी मजबूत नेता को अध्यक्ष पद पर उतार कर उन्हें चुनाव हरवाया जा सकता है। गहलोत समर्थक विधायक इस बात की आशंका दो बैठकों में जता चुके हैं। समर्थकों के अनुसार गहलोत को अध्यक्ष पद पर चुनाव हरवाने के लिए पहले से एक लॉबी सक्रिय है।

इसबीच, कांग्रेस आलाकमान ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से संपर्क कर उन्हें दिल्ली बुलाया है। सूत्रों का दावा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन के दिल्ली लौटने पर राजस्थान कांग्रेस संकट में कमलनाथ के मध्यस्थता करवाने की संभावना है। कमलनाथ को अशोक गहलोत करीबी माना जाता है।

ये बगावत ही है

वहीं, राजस्थान अनूसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष खिलाड़ी लाल बैरवा ने कहा कि एक बच्चे से भी पूछेंगे तो वह भी बता देगा कि इतना कुछ होने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की कोई गुंजाइश नहीं बनती। सचिन पायलट पार्टी का वफादार सिपाही है। सब विधायक आलाकमान के साथ हैं। हाईकमान को फैसला लेना चाहिए कि सीएम कौन होगा। उन्होंने कहा, जब मुख्यमंत्री निवास में एक बैठक आयोजित की गई थी, तो फिर दूसरी जगह बैठक करने की क्या जरूरत थी. क्या यह बगावत नहीं है?

गहलोत समर्थक विधायक का यू-टर्न

एक अन्य घटनाक्रम में गहलोत खेमे की विधायक इंदिरा मीणा ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री आवास पर होनी वाली बैठक से पहले एक मंत्री के घर पहुंचने के लिए कहा गया था, जहां एक कागज पर उनसे साइन कराया गया, जिसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने ये भी कहा कि सचिन पायलट सीएम बनेंगे तो अच्छा रहेगा। 

राजस्थान में राजनीतिक उठा-पटक को लेकर कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत बड़े नेता हैं, लेकिन न पार्टी से बड़े हैं और न ही गांधी परिवार से। अगर वह सोच रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार उनके सामने झुक जाएगा तो वह इस मुगालते को अपने जेहन से निकाल दें। क्योंकि यह वही गांधी परिवार है, जो नरेंद्र मोदी के आगे भी नहीं झुका।

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