कोहली पर आरोप लगाकर फंसेगा बांग्लादेश

आईसीसी टी20 वर्ल्ड के सुपर-12 मुकाबले में बुधवार को भारत से पांच रन की हार के बाद बांग्लादेश के विकेटकीपर बल्लेबाज नुरूल हसन ने दावा किया है कि विराट कोहली ने फेक फील्डिंग की थी, जिसे मैदानी अंपायरों ने मिस कर दिया। अन्यथा बांग्लादेश को पांच पेनल्टी रन मिल सकते थे। उस समय बांग्लादेश के कप्तान शाकिब अल हसन भी बारिश बाद फिर खेल शुरू होने से पहले अंपायरों के साथ बातचीत करते नजर आए थे। अब, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने कथित तौर पर ‘विवादास्पद अंपायरिंग’ मामले को ‘उचित मंच’ पर उठाने का फैसला किया है।

फेक फील्डिंग के इस विवाद ने क्रिकेट जगत को बांट दिया है। बांग्लादेश ने विराट कोहली जैसे बड़े प्लेयर पर आरोप लगाया तो अलग-अलग बयान भी आने लगे हैं। लेकिन आईसीसी की नियमावली पर नज़र डालें तो विराट कोहली पर आरोप लगाने वाली बांग्लादेश की टीम खुद इस मामले में फंस सकती है। आईसीसी की खेलने की शर्तों के नियम 41.5 के अनुसार फील्डिंग करने वाली टीम बल्लेबाज को जान बूझकर बाधा नहीं पहुंचा सकती या उसका ध्यान नहीं भटका सकती। अगर अंपायर को ऐसा लगता है कि किसी खिलाड़ी ने नियम तोड़ा है तो वह डेड बॉल घोषित करके पेनल्टी के पांच रन दे सकते हैं। चूंकि शंटो और लिट्टन ने कोहली की तरफ देखा भी नहीं तो उनका ध्यान भटकने का सवाल ही नहीं उठता। ऐसे में नियम कहता है कि मैच अधिकारियों पर इस तरह बिना सबूत गंभीर आरोप लगाने वाले खिलाड़ी पर आईसीसी द्वारा एक्शन लिया जा सकता है। मतलब, विकेटकीपर नुरूल हसन खुद ही विराट कोहली पर आरोप लगाकर फंस सकते हैं, जिन्होंने अंपायर्स पर विराट कोहली की फेक फील्डिंग पर नहीं ध्यान देने का आरोप लगाया है। 

इधर, एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बीसीबी के क्रिकेट संचालन अध्यक्ष जलाल यूनुस ने कहा कि शाकिब ने अंपायरों के साथ ‘फेक फील्डिंग’ का मामला उठाया था, लेकिन उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। मैच के बाद पत्रकारों से बात करते हुए नुरूल ने इस घटना का जि़क्र किया। उन्होंने कहा, हम सभी ने देखा कि यह गीला मैदान था। जब हम इन चीजो के बारे में बात करते हैं, तो एक फेक थ्रो भी किया गया था। यह पांच रन की पेनल्टी हो सकता था। वह हमारे पक्ष में आ सकता था, लेकिन दुर्भाग्य से यह अमल में नहीं आया।

रिपोर्ट के अनुसार जलाल ने कहा, हमने इसके बारे में बात की है। आपने इसे टीवी में देखा है और सब कुछ आपके सामने हुआ है। उसमें से एक मामला फेक थ्रो से जुड़ा था और हमने अंपायरों को फेक थ्रो के बारे में सूचित किया था, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए रिव्यू लेने से इनकार कर दिया कि उन्होंने इसे नोटिस नहीं किया। शाकिब ने अंपायर इरास्मस के साथ इस बारे में बहुत चर्चा की और यहां तक ​​कि खेल के बाद भी उनसे बात की।

जलाल ने यह भी कहा कि शाकिब ने बारिश की रुकावट के थोड़ी देर बाद ही अंपायरों से खेल शुरू करने का अनुरोध किया था, लेकिन अंपायरो ने इसे ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि दूसरा मुद्दा, शाकिब ने गीले मैदान के बारे में अंपायरों बात की थी और उन्होंने कहा कि वह कुछ और समय ले सकते हैं। मैदान सूखने के बाद खेल शुरू कर सकते हैं, लेकिन अंपायरों का फैसला अंतिम है और यही कारण है तर्क के लिए कोई जगह नहीं थी। केवल एक ही फैसला था कि आप खेलेंगे या नहीं। जलाल ने अब पुष्टि की है कि बीसीबी उनकी चिंता को ‘उचित मंच पर’ उठाने का इरादा रखता है। उन्होंने कहा, यह हमारे दिमाग में है, ताकि हम इस मुद्दे को उचित मंच पर उठा सकें।

फेक फील्डिंग’ की घटना बांग्लादेश द्वारा लक्ष्य का पीछा करने के दौरान सातवें ओवर में हुई, जब लिट्टन दास ने अक्षर की गेंद को डीप ऑफ साइड में खेला। जैसे ही अर्शदीप सिंह ने थ्रो किया, प्वॉइंट पर खड़े कोहली ने अपने पास से जा रही गेंद पर नॉन-स्ट्राइकर की ओर थ्रो करने जैसी फेक फील्डिंग की। इसपर उस समय मैदान में मौजूद किसी का ध्यान नहीं गया, जिस वजह से मैदानी अंपायरों मरे इरास्मस और क्रिस ब्राउन ने कोई एक्शन नहीं लिया। यहां तक कि बांग्लादेश के दोनों बल्लेबाजों लिट्टन दास और नजमुल हुसैन शांतो ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया।

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